नई दिल्ली। श्रीलंकाई बंदरगाह पर चीनी जासूसी जहाज के ठीक ऊपर भारत ने अपने सैन्य सैटेलाइट रुक्मिणी और एंग्री बर्ड को लगा दिया। इन सैटेलाइट्स ने कुछ ऐसा कमाल किया कि चीन के जासूसी जहाज का रिसीवर अब जंक “सीक्रेट इंटेलिजेंस डेटा” से भर गया। चीनी राष्ट्रपति “शी” जिंग-पिंग ने चीन के उस सैन्य विशेषज्ञ को निकाल दिया है। जिसने इस जहाज को खुफिया संकेत एकत्र करने के लिए श्रीलंका भेजने का सुझाव दिया था। भारत की खुफिया जानकारी जुटाने की चीनी योजना अब धराशायी हो गई है। जहाज में स्टोरेज डिस्क को भारत ने जंक इन्फॉर्मेशन से भर दिया। अब इसके इन्फॉर्मेशन डिस्क को फिर से फॉर्मेट करने की जरूरत चीन को आन पड़ी है।
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अंतर्राष्ट्रीय खुफिया विशेषज्ञ हैरान हैं कि भारत ने कैसे और किस तरह के मास्टर प्लान के साथ इस चीनी खतरे को पल में निपटा लिया है। चीनी जहाजों के संचार प्रोटोकॉल, इसकी एन्क्रिप्शन तकनीक और अन्य मानक जैसे चीनी सैन्य प्रौद्योगिकी जानकारी , इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम को मापने और जमीन और नौसेना दोनों के रडार उत्सर्जक के स्थान इन सब की जानकारी पहले भारतीय टोही उपग्रह EMISAT ने एकत्र कर ली है। भारत ने ऐसी व्यवस्था कर रखी है कि एक बाइट का इंफॉर्मेशन भी शत्रु के हाथ न लग सके। यहां तक कि हाथ मिलाने का प्रोटोकॉल भी इसमें बंद हैं और जहाज के श्रीलंकाई जल में प्रवेश करने से पहले अच्छी तरह से धुलाई की जाती है। भारत ने चीनी जासूसी जहाज की श्रीलंका समुद्र में इतनी सावधानीपूर्वक घेराबंदी की है कि चीनी जहाज की कार्यक्षमता को चारों तरफ से कस दिया है। डीआरडीओ की सूझबूझ और इज़राइल की बेहतरीन तकनीक से लैस भारतीय नौसेना के दो विश्व स्तरीय जासूसी जहाज जरूरत पड़ने पर चीनी सायबर जंक को साफ करने के लिए तैयार किया हैं। चीन ऐसी हरकत करते समय शायद चीन भारत के ELINT सिस्टम से लैस जासूसी सैटेलाइट “कौटिल्य” की क्षमताओं को भूल गया था।
