नई दिल्ली। आने वाले त्योहारी सीजन में देश के प्रमुख बैंकों को जमा में कमी का सामना करना पड़ सकता है। पहले से नकदी की तंगी और बढ़ते कर्ज के बीच बैंकों को कड़ी प्रतिस्पर्धा के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। त्योहारों के सीजन में अचानक बैंकों से अधिक रकम निकलती है क्योंकि बड़े पैमाने पर लोग इस दौरान खरीदी करते हैं। इस हफ्ते की शुरुआत में 40 महीनों में पहली बार भारतीय बैंकिंग सिस्टम में तरलता की भारी कमी आई है। ब्रोकरेज हाउस मैक्वायरी में वित्तीय अनुसंधान के मुताबिक हमें लगता है कि जमा और कर्ज में वृद्धि के बीच बैंकों को चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। इससे जमा की वृद्धि दर केवल 9.5 प्रतिशत है और कर्ज की वृद्धि 15.5 प्रतिशत से ऊपर है।
रिपोर्ट के मुताबिक, त्योहारी के सीजन में जैसे-जैसे तेजी आएगी, तरलता और कम होती जाएगी। इसके अलावा इस दौरान लोग बहुत अधिक नकदी रखते हैं। इससे तरलता और भी तेजी से घटेगी। एलएंडटी फाइनेंशियल प्रमुख अर्थशास्त्री रूपा रेगे के मुताबिक सिस्टम में अतिरिक्त तरलता के कारण बैंक जमा दरों को बढ़ाने में पीछे हैं। हालांकि उधारी पर ब्याज को बढ़ा दिया गया है। इसलिए बैंकों को अब जमा पर ब्याज बढ़ाना मजबूरी हो गई है। बैंक थोक जमाओं पर अधिक निर्भर रहते हैं और यह उनके लिए बहुत खराब संकेत है। बैंको का मानना है कि विकास को समर्थन देने के लिए धन केवल कर्ज से नहीं जुटाया जा सकता। इसलिए आने वाले महीनों में और अधिक उपायों को अपनाकर ब्याज दरें बढ़ानी होगी। एसबीआई फिलहाल एक से दो साल की जमा पर 5.45 प्रतिशत ब्याज दे रहा है। जबकि थोक जमा पर यह 6 प्रतिशत है। एक अधिकारी ने बताया कि आमतौर पर दूसरी छमाही में कर्ज की मांग बढ़ने से ऐसे में उम्मीद है कि जमा पर ब्याज बढ़ाना होगा।
