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पिछले साल सस्ते भाव पर खरीदे गए तेल का प्रयोग करे भारत: सऊदी अरब


पिछले साल सस्ते भाव पर खरीदे गए तेल का प्रयोग करे भारत: सऊदी अरब

नई दिल्ली: महंगे तेल से लोगों को आगे भी झटका लग सकता है. एक तरफ ओपेक+ देशों ने इसके उत्पादन में बढ़ोतरी का फैसला नहीं किया और दूसरी तरफ तेल कंपनियों ने पिछले पांच साल से दाम नहीं बढ़ाए हैं और अगर उन्होंने महंगे क्रूड प्राइसेज का भार आम लोगों पर डाला तो पेट्रोल-डीजल के भाव में जबरदस्त उछाल आ सकता है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महंगे तेल की कीमतों के चलते भारत ने ओपेक (ऑर्गेनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज) और रुस (ओपेक+) से उत्पादन नियंत्रण में ढील देने को कहा था. इस पर सऊदी अरब ने भारत से कहा कि वह पिछले साल सस्ते भाव पर खरीदे गए तेल का प्रयोग कर महंगाई से राहत दे सकती है.

आपूर्ति नहीं बढ़ाने का फैसला
ओपेक+ देशों द्वारा अप्रैल में आपूर्ति नहीं बढ़ाने का फैसला लिए जाने के बाद शुक्रवार को इसकी कीमत 1 फीसदी बढ़कर 67.44 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई. भारतीय तेल मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ओपेक देशों से उत्पादन पर अपना नियंत्रण कम करने को अनुरोध किया था ताकि तेल की कीमतें स्थिर रह सकें.

पड़ रहा है नकारात्मक प्रभाव
धर्मेंद्र प्रधान के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती तेल की कीमतों से इकोनॉमिक रिकवरी और मांग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है. पिछले साल कोरोना महामारी के वक्त तेल की मांग लगभग शून्य हो जाने के चलते भारत ने ओपेक+ देशों द्वारा क्रूड प्रोडक्शन में कटौती किए जाने का समर्थन किया था. केंद्रीय मंत्री के मुताबिक उस समय ओपेक ने 2021 की शुरुआत से सामान्य उत्पादन करने की बात कही थी लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हो सका है.

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