नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने चीन को दी गई रैपिड टेस्ट किट के आर्डर को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही केंद्र ने कहा है कि जो भी किट ऑर्डर की गई हैं, उन्हें वापस किया जा रहा है। इस सौदे में एक रुपया भी नुक्सान नहीं हुआ है। सरकार ने यह भी कहा है कि इन कंपनियों को भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। दरअसल, चीन से आने वाली किट लगातार सवालों के घेरे में हैं । इसकी गुणवत्ता को लेकर पिछले कई दिनों से सवाल उठ रहे हैं। देश में चल रहे कोरोना वायरस महामारी संकट के बीच सोमवार को केंद्र ने यह जानकारी दी है।
हाल के दिनों में कई राज्यों की सरकारें टेस्ट किट के ठीक से काम नहीं करने की शिकायत करती रही हैं। पिछले हफ्ते कांग्रेस शासित राज्य राजस्थान ने इस बारे में शिकायत की थी और कहा था कि टेस्ट किट का मानक सही नहीं है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में भी नई टेस्ट किट को लेकर शिकायत की गई थी। राज्य द्वारा कहा गया कि यह किट केवल 5.4 प्रतिशत तक ही सही परिणाम दे रही है। इसके साथ ही केंद्र की इस खरीद पर कांग्रेस जैसे कई विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं।
राज्य सरकारों की शिकायतों के बीच इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने भी इन शिकायतों को सही पाया है। आईसीएमआर ने राज्यों से कहा है कि वे दो चीनी कंपनियों द्वारा ऑर्डर की गई रैपिड टेस्ट किट का इस्तेमाल न करें । इस संबंध में केंद्र ने अपने बयान में कहा कि चीन के ग्वांग्झू वोंडाफो बायोटेक और झूई लिवजोन डायग्नोस्टिक्स द्वारा आपूर्ति की गई टेस्ट किट की गुणवत्ता एक ही गुणवत्ता की नहीं पाई गई है ।

