इंडिया ब्लॉक् ने संसद के बाहर जताया स्वास्थ्य बीमा पर 18% जीएसटी का विरोध

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विपक्ष के इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने जीवन और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर 18 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लगाने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ संसद के मकर द्वार के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। विपक्षी नेताओं ने “स्वास्थ्य बीमा पर जीएसटी कर आतंकवाद है” लिखी तख्तियां लेकर सरकार से स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर जीएसटी वापस लेने की मांग की। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी बीमा प्रीमियम पर जीएसटी वापस लेने की मांग में इंडिया गठबंधन के सदस्यों के साथ शामिल हुए।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए स्वास्थ्य बीमा पर कर की निंदा करते हुए कहा कि 18 प्रतिशत जीएसटी लोगों के लिए उचित नहीं है। “आप वास्तव में जीवन बीमा जैसी आवश्यक चीज पर जीएसटी नहीं लगा सकते। सरकार ने 2047 तक सभी के लिए जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा की नीति की घोषणा की है, और अब वे इस तरह से कर लगा रहे हैं कि इसे कभी हासिल करना संभव नहीं है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की महुआ माजी ने थरूर की भावनाओं को दोहराते हुए मोदी सरकार की इस कर को जल्दबाजी में लागू करने की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार स्वास्थ्य बीमा पर जीएसटी कम नहीं करती, तब तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी।

भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में भी स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर 18 प्रतिशत जीएसटी की आलोचना हो रही है। पिछले महीने केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर उनसे जीवन और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर जीएसटी लगाने पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया था। वित्त मंत्री को लिखे पत्र में गडकरी ने नागपुर मंडल जीवन बीमा निगम कर्मचारी संघ द्वारा उठाई गई चिंताओं से अवगत कराया।

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