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Chandrayaan 3 landing: चंद्रयान की सफल लैंडिंग के बाद भारत बना धनकुबेर, सोने से अधिक कीमती चांद के बर्फ की

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Chandrayaan 3 successful landing: चंद्रयान की सफल लैंडिंग के साथ भारत धनकुबेर बन गया। ऐसा दुनिया के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का मानना है। आज जितना रुपया चंद्रयान 3 अभियान में भारत ने लगाया है। चंद्रयान 3 की सफलता के बाद उससे कई लाख गुना रुपया भारत पर बरसेगा। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का मानना है कि अब भारत ही एक मात्र ऐसा देश है जिसके पास चांद के दक्षिण ध्रुव पर उतरने का अनुभव है। इससे भारत को अटूट आर्थिक धन लाभ होगा।

दुनिया के वैज्ञानिकों का मानना है कि चंद्रमा पर की बर्फ दरअसल अंतरिक्ष का सोना है। चंद्रमा पर जमी बर्फ का खनन पीने के पानी के लिए किया जा सकता है। चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर उतरकर भारत ने अंतरिक्ष में सांस लेने के लिए जरूरी ऑक्सीजन और रॉकेट फ्यूल के लिए इसे हाइड्रोजन के रूप में खोज करने में सफलता पाई है।

चंद्रयान-3 चंद्रमा के साउथ पोल पर लैंड

चंद्रयान-3 बुधवार शाम 6.04 पर चंद्रमा के साउथ पोल पर लैंड कर गया। चंद्रयान की सफल लैंडिंग के बाद भारत को चंद्रमा का खजाना हाथ लग गया है। दरअसल, चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव वह हिस्सा है जो अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए हमेशा से रहस्य है। दक्षिणी ध्रुव पर वह जगह है जहां पर कुछ जगह एकदम अंधेरा है तो कुछ पर रोशनी है। इसके करीब धूप-पानी दोनों ही है। कुछ हिस्सों में स्थाई रूप से छाया के साथ बर्फ जमा है। अमेरिकी अंतरिक्ष संस्थान नासा का दावा है कि, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के कुछ गड्ढों पर तो अरबों साल से सूरज की रोशनी नहीं पहुंची है। इन गड्ढों वाली जगह का तापमान -203 डिग्री सेल्सियस है।

चंद्रमा पर जमी बर्फ अंतरिक्ष का सोना

अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का मानना है कि, चंद्रमा पर जमी ये बर्फ दरअसल अंतरिक्ष का सोना है। जिसकी कीमत धरती के सोने के दाम से लाखों गुना अधिक है। चांद पर जमी इस बर्फ का खनन पीने के पानी के लिए किया जा सकता है। इसी के साथ सांस लेने के लिए जरूरी ऑक्सीजन और रॉकेट फ्यूल के लिए भी इसे हाइड्रोजन में बांटा जा सकता है। वैज्ञानिकों का मत है कि इस ईंधन का उपयोग न सिर्फ पारंपरिक अंतरिक्ष यान के लिए होगा। बल्कि उन हजारों उपग्रहों के लिए किया जाएगा जिनको अलग-अलग मकसद के लिए अंतरिक्ष में भेजा जाना है।

चंद्रयान 3 के शोध से बनेंगे खरबों डॉलर

भारत के चंद्रयान-3 द्वारा की गई खोज ने मून इकॉनोमी के लिए बड़े दरवाजे खोल दिए हैं। भारत के चंद्रयान 3 के सफल होने से अब कई अहम जानकारी हमारे पास होगी। अंतरिक्ष से जुड़े व्यापार में अब भारत विश्व में नंबर वन बन गया है। साल 2040 तक मून इकॉनमी के 4200 करोड़ डॉलर के होने का अनुमान है। चांद तक ट्रांसपोर्टेशन का बिजनेस 2040 तक 42 अरब डॉलर तक जाने की उम्मीद है। चंद्रयान 3 की सफलता के बाद अंतरिक्ष के इस व्यापार में भारत की भागीदारी विश्व में तगड़े तरीके से बढ़ी है। ​चंद्रयान 3 की सफल लैंडिंग के बाद अब भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जिसके पास चांद के दक्षिण ध्रुव के अलावा पूरे चंद्रमा का डेटा उपलब्ध होगा।

भारत का अंतरिक्ष व्यापार लाखों गुना

इसके अलावा भारत के पास चंद्रमा का जो डेटा होगा। उससे आने वाले दिनों में भारत का अंतरिक्ष व्यापार लाखों गुना होगा। विश्व में कई देश हैं, जो चांद पर सफल लैंडिंग नहीं कर सकते। वे रिसर्च के लिए भारत से करोड़ों डॉलर में इस डेटा को खरीद सकते हैं। इससे वे बिना चांद पर जाए अपनी रिसर्च कर सकते हैं। चांद पर पानी मिलता है, तो उस पानी से ऑक्सीजन बनाई जाने की ताकत भारत के पास ही है। इससे भविष्य में वहां बेस बनाए जा सकते हैं। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के मुताबिक साल 2030 तक चांद पर 40 और साल 2040 तक 1000 एस्ट्रोनॉट चांद पर रह रहे होंगे। इसके लिए चंद्रयान-3 की रिसर्च काफी काम आएगी।

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