भारत और अमेरिका लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ता को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि दोनों देश जल्द समझौता कर सकते हैं, हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि यह अमेरिका के दूसरे व्यापार समझौतों से “काफी अलग तरह” का हो सकता है।
मंगलवार को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, “वे समझौता करना चाहते हैं। हम समझौता करेंगे। हम इसके काफी करीब हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि यह “बहुत अलग तरह की डील” हो सकती है, लेकिन इसके स्वरूप या नई शर्तों के बारे में कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी।
Rubio बोले- 99% काम पूरा, कुछ मुद्दे ही बाकी
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी भारत दौरे के दौरान व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं।
रुबियो ने कहा कि अमेरिका और भारत किसी औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर किए बिना जितना करीब पहुंच सकते हैं, उतना करीब पहुंच चुके हैं।
The Indian Express को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि डील का करीब 99 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और अब कुछ सीमित मुद्दों तथा कानूनी भाषा पर सहमति बननी बाकी है।
रुबियो ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि आने वाले कुछ हफ्तों में इस पर अच्छी खबर सामने आ सकती है।
Jaishankar-Rubio बैठक में ट्रेड, एनर्जी और टेक्नोलॉजी पर चर्चा
मुंबई में विदेश मंत्री एस जयशंकर और मार्को रुबियो के बीच हुई बैठक में व्यापार समझौते के अलावा ऊर्जा सुरक्षा, टेक्नोलॉजी, रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
रुबियो ने भारत से अमेरिकी ऊर्जा और टेक्नोलॉजी उत्पादों की खरीद बढ़ाने की बात कही। दोनों देशों ने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया।
रुबियो की भारत यात्रा ऐसे समय हुई है जब दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते का पहला चरण कानूनी रूप लेने के करीब है।
Piyush Goyal: पहले चरण की कानूनी ड्राफ्टिंग जारी
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले सप्ताह कहा था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप दिया जा चुका है और अब उसकी कानूनी ड्राफ्टिंग की जा रही है।
गोयल ने कहा कि भारत समझौते को तभी लागू करना चाहता है जब भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में उचित या बेहतर बाजार पहुंच मिले।
इससे पहले अक्टूबर की शुरुआत में गोयल ने अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि Jamieson Greer से मिल्वॉकी में G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के दौरान मुलाकात की थी।
उस समय Greer ने कहा था कि समझौता तत्काल नहीं होने जा रहा, लेकिन दोनों देशों ने मुख्य अड़चनों की पहचान कर ली है और उन्हें दूर करने के लिए काम जारी है।
फरवरी में बनी थी Interim Agreement की रूपरेखा
भारत और अमेरिका ने 6 फरवरी 2026 को reciprocal and mutually beneficial trade के लिए एक अंतरिम समझौते की रूपरेखा घोषित की थी।
इसके तहत अमेरिका ने भारतीय सामान पर reciprocal tariff को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति जताई थी। दोनों देशों ने बाजार पहुंच, गैर-टैरिफ बाधाओं, डिजिटल ट्रेड और सप्लाई चेन जैसे मुद्दों पर भी आगे बातचीत करने का फैसला किया था।
भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिकी ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, विमान और अन्य उत्पादों की खरीद बढ़ाने की मंशा भी जताई थी।
हालांकि बदलती अमेरिकी टैरिफ नीतियों और रूस से भारत की ऊर्जा खरीद जैसे मुद्दों के चलते अंतिम समझौते पर बातचीत आगे भी जारी रही।
अमेरिकी राजदूत बोले- बड़े मुद्दे सुलझ गए
भारत में अमेरिकी राजदूत Sergio Gor ने पिछले सप्ताह नई दिल्ली में Bloomberg New Economy Forum में कहा था कि दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता तेजी से आगे बढ़ रही है।
उनके मुताबिक, “बड़े मुद्दे” लगभग सुलझ चुके हैं और दोनों पक्ष समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं।
यह बयान पीयूष गोयल और मार्को रुबियो की हालिया टिप्पणियों से भी मेल खाता है, जिनमें दोनों ने बातचीत के अंतिम चरण में होने की बात कही है।
ट्रंप के ‘अलग तरह की डील’ वाले बयान का क्या मतलब?
ट्रंप ने कहा है कि भारत के साथ प्रस्तावित समझौता अमेरिका द्वारा पहले किए गए व्यापार समझौतों से अलग हो सकता है।
हालांकि व्हाइट हाउस या अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह अंतर टैरिफ, भारतीय बाजार तक अमेरिकी कंपनियों की पहुंच, ऊर्जा खरीद, डिजिटल ट्रेड या किसी अन्य शर्त से जुड़ा होगा।
इसलिए ट्रंप के बयान से समझौते के अंतिम स्वरूप को लेकर अटकलें लगाना अभी जल्दबाजी होगी।
Russian Oil Tariff का खतरा भी फिलहाल टला
ट्रेड डील को लेकर सकारात्मक संकेत ऐसे समय आए हैं जब ट्रंप प्रशासन ने पिछले सप्ताह रूस से जुड़े नए प्रतिबंधों और संभावित टैरिफ में अस्थायी छूट दी थी।
Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 के तहत रूस के सबसे बड़े तेल और गैस खरीदार देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता था। भारत भी संभावित रूप से इस दायरे में आ सकता था।
ट्रंप प्रशासन ने फिलहाल इन प्रावधानों को waive किया है। Reuters के मुताबिक इस कदम से भारत की ऊर्जा संबंधी चिंताएं कम हुई हैं और इससे व्यापार समझौते की संभावनाओं को भी मदद मिल सकती है।
हालांकि यह छूट स्थायी नहीं है और भविष्य में अमेरिकी प्रशासन इन प्रावधानों को दोबारा लागू कर सकता है।
अब नजर अंतिम शर्तों और घोषणा पर
फिलहाल भारत और अमेरिका दोनों की ओर से संकेत मिल रहे हैं कि व्यापार समझौता अपने अंतिम चरण में है।
मार्को रुबियो इसे 99 प्रतिशत पूरा बता रहे हैं, पीयूष गोयल पहले चरण की कानूनी ड्राफ्टिंग जारी होने की पुष्टि कर चुके हैं और अमेरिकी राजदूत का कहना है कि प्रमुख मुद्दों पर सहमति बन चुकी है।
इसके बावजूद अंतिम समझौते की पूरी शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं हुई हैं।
ऐसे में अब सबसे बड़ी नजर इस बात पर होगी कि ट्रंप के “अलग तरह की डील” वाले बयान का अंतिम समझौते में क्या असर दिखाई देता है और भारत को अमेरिकी बाजार में टैरिफ तथा बाजार पहुंच के मामले में क्या अतिरिक्त लाभ मिलता है।

