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Tomato Fever Cases: तेजी से बढ़ रहे टोमेटो फीवर के मामले, चिकित्सकों ने दी ये सलाह

नई दिल्ली। भारत सहित पूरी दुनिया में अभी कोरोना का कहर और मंकीपाक्स के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। वहीं अब देश मे एक नया वायरल हैंड, फुट एंड माउथ डिजीज, जिसे आमतौर पर टोमैटो फ्लू कहा जा रहा है। इस समय तेजी से बढ़ रहा है। इसके कई मामले उत्तरी भारत में दर्ज किए जा रहे हैं। कोरोना महामारी अभी समाप्त नहीं हुई है कि लोग अब टोमेटो फ्लू से जूझ रहे है। टोमेटो फ्लू के मामलों में भारी वृद्धि हो रही है।ये आमतौर पर 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित कर रहा है। दिल्ली आरएमएल अस्पताल के त्वचा विशेषज्ञ भावुक धीर ने कहा कि वायरल रोगों के युग की ओर बढ़ने का संकेत है। धीर ने कहा, स्पष्ट रूप से हम अब कोविड -19, मंकीपाक्स और अब एचएफएमडी के प्रकोप के साथ वायरल बीमारियों के युग की ओर बढ़ रहे हैं, जैसा कि अतीत में विभिन्न शोधकर्ताओं द्वारा भविष्यवाणी की थी। धीर ने कहा, टोमेटो फ्लू अलग बीमारी के बजाय एचएफएमडी का एक प्रकार है। यह काक्ससेकी वायरस ए16 के कारण होता है, जो अत्यधिक संक्रामक है और नाक, गले, फफोले से तरल पदार्थ और फेकल-ओरल मार्ग में स्राव के माध्यम से फैलता है।

उन्होंने कहा कि अधिकतर मामलों में, यह हल्का आत्म-सीमित वायरल रोग है और इसके ठीक होने के लिए सहायक देखभाल की जरूरत होती है। कुछ में मेनिन्जाइटिस और प्रसार संक्रमण जटिलताएं हो सकती हैं। पिछले महीने, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने टोमेटो फ्लू पर गाइडलाइंस जारी की थी। जिसमें बताया था कि इसके उपचार के लिए लोगों को अलग कमरे में रहना चाहिए। जलन और चकत्ते से राहत के लिए आराम, बहुत तरल पदार्थ और गर्म पानी के स्पंज जैसी अन्य वस्तुओं का उपयोग करना जरूरी है। बुखार और शरीर में दर्द के लिए पैरासिटामोल की आवश्यकता  है। मंत्रालय के दिशानिर्देशों में कहा है कि टोमेटो फ्लू एक आत्म-सीमित संक्रामक बीमारी है। इसके लक्षण कुछ दिनों के बाद ठीक हो जाते हैं। ऐसा लगता है कि यह रोग एचएमएफडी का नैदानिक रूप है जो स्कूल जाने वाले बच्चों में आम होता है।

दिशानिर्देशों में कहा है कि लंगोट के इस्तेमाल, अशुद्ध सतहों को छूने और चीजों को सीधे मुंह में डालने से शिशुओं और छोटे बच्चों को संक्रमण का खतरा होता है। एचएफएमडी मुख्य रूप से 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में फैल रहा है, लेकिन यह वयस्कों में हो सकता है। कोई रोग-विशिष्ट दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। टोमेटो फ्लू का पहला मामला केरल के कोल्लम में 6 मई, 2022 को सामने आया । मंत्रालय ने कहा था कि टोमेटो फ्लू के उपचार या रोकथाम के लिए कोई एंटीवायरल दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।
धीर ने कहा, ‘टोमेटो फीवर’ शब्द का इस्तेमाल लाल रंग के फफोले के कारण किया था जो टमाटर जैसा होता है। 2007 में केरल में इसी तरह का मामला दर्ज किया गया था। संक्रमण के प्रबंधन के बारे में बात करते हुए धीर ने कहा कि अधिक दिक्कतों वाले बच्चों को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता हो सकती है। इस विकार के इलाज के लिए कोई एंटीवायरल थेरेपी उपलब्ध नहीं। वर्तमान में उपलब्ध एंटीवायरल जैसे एसाइक्लोविर परीक्षणों में प्रभावी नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि जब रोगी पर्याप्त जलयोजन बनाए रखने में असमर्थ है या मौखिक सेवन में कमी, सुस्ती और चिड़चिड़ापन हो तो ऐसी जटिलताओं में डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

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