नई दिल्ली: आगामी यूपी विधानसभा को देखते हुए भारतीय किसान यूनियन ने एक अगस्त से पूरे उत्तर-प्रदेश में किसान आदोंलन को धार देने का ऐलान कर दिया है. भाकियू कार्यकर्ता अब गांव-गांव जाकर सरकार की दमनकारी नीतियों का ढिंढोंरा पीटेगें.
पश्चिम बंगाल की तर्ज़ पर यूपी
भारतीय किसान यूनियन कृषि कानूनों के विरोध में जारी आंदोलन के नतीजे पश्चिम बंगाल विधानसभा की तरह देख रही है. इसलिए भाकियू ने 11 जुलाई से मंडलवार बैठकों की तैयारी कर ली है. प्रदेश के 18 मंडलों में संगठन की बैठकें आयोजित करके संगठन एक अगस्त से शुरू होने वाले आंदोलन की रणनीति तैयार करेगी. भाकियू केन्द्र और प्रदेश सरकारों की नीतियों की खामियों से किसानों को रूबरू करायेगी.
गाँव गाँव जायेंगे किसान
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता और गाजीपुर बार्डर पर आंदोलन कर रहे राकेश टिकैत ने बताया कि एक अगस्त से भाकियू गांव-गांव जाकर बतायेगा कि हरियाणा में जिस बिजली का रेट 35 रूपये प्रति किलोवाट है वह उत्तरप्रदेश में कैसे 175 रूपये प्रति किलोवाट हो जाता है. प्रदेश में गन्ना किसानों को साढ़े 8 हजार करोड़ अभी तक बकाया है. 14 दिन में गन्ना किसान का भुगतान कराने का दावा करने वाली यूपी सरकार की यह असलियत है.
बहरी है सरकार
राकेश टिकैत ने कहा कि 1975 रूपये एमएसपी होने के बाबजूद प्रदेश के गेहूं किसानों की फसल 1400 रूपये कुंटल में लूट ली गयी. चावल के साथ भी यही हुआ और आगे भी होगा. सरकार बहरी है और किसानों की आवाज नही सुनती. उन्होने कहा कि हम सरकार को गन्ना किसानों के बकाया के भुगतान के लिए बाध्य करेगे. हम बतायेगे कि बिजली की कीमतें सरकार को वापिस लेनी होगी.
9 जुलाई से दूसरी किसान ट्रैक्टर यात्रा
टिकैत ने यह भी कहा कि कोरोनाकाल में मारे गये किसानों को मुआवजा का मुद्दा भी हमारी मांगों में शामिल है. 9 जुलाई से दूसरी किसान ट्रैक्टर यात्रा शामली से चलेगी और 11 जुलाई को गाजीपुर बार्डर के धरनास्थल पर पहुंचेगी.

