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आने वाले दौर में भारत की तकदीर लड़कियां ही लिखेंगी- मालिनी अवस्थी


आने वाले दौर में भारत की तकदीर लड़कियां ही लिखेंगी- मालिनी अवस्थी

Zeba Hasan

औरत जो इस धरती की मां है, सृजन है, अन्नपूर्णा है उसके लिए एक दिन स्थापित करना यह सोच कुछ अख्रती है। लेकिन यह भी सच है कि इस शुरुआत ने महिलाओं को एक नई राह दिखाई है, यह कहना है पद्मश्री मालिनी अवस्थी (Malini Awasthi) का। सीनियर आईएएस अधिकारी की पत्नी, दो बच्चों की मां की जिम्मेदारी उठाने के साथ मालिनी ने देश ही नहीं विदेश में अपनी गायकी से कईएक अलग पहचान बनाई है। कई महिलाओं के लिए रोल मॉडल बन चुकीं मलिनी अवस्थी ने महिला दिवस के अवसर पर अपने विचार हमसे साझा किए।

महिलाएं अब राजनीति में भी भागीदार

सांस्कृतिक मंच से लेकर कई फिल्मों में आवाज का जादू चलाने वाली मालिनी कहती हैं कि एक वक्त था जब महिलाओं के लिए घर की चाहरदीवारी में ही दुनिया बसती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं है। आज 2022 में हम देख रहे कि चुनाव में आधी आबादी को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। मेनीफेस्टो में उसके मुद्दों का जगह मिली है। हर पार्टी महिलाओं को अहमियत दे रही है। यहीं नहीं अब तो महिलाओं को पार्टियां चुनाव लड़ा रही हैं। उन्हें इतनी इज्जत मिल रही है कि उनके लिए शौचालय बनवाए जा रहे हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि अब मिलाओं को नजरअंदाज करना किसी के लिए भी आसान नहीं होगा। जिस तरह से महिलाओं के हक में बदलाव दिख रहे हैं, महिलाएं आगे आ रही हैं, हर फील्ड में डंका बजा रही हैं, एक वक्त् ऐसा भी आएगा जब इस देश की तकदीर लड़कियां ही लिखेंगी।

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मेहनत और धीरज से उगेगा कामयाबी का सूरज

कन्नौज में जन्मीं और लखनऊ में पली बढ़ी मालिनी अवस्थी (Malini Awasthi) भोजपुरी, अवधी, बुंदेलखंडी के साथ ठुमरी और कजरी गाने में भी माहिर हैं। अपनी कला के साथ घर की जिम्मेदारियों को बखूबी अंजाम देने वाली मालिनी कहती हैं कि अकसर औरतों की पूरी जिंदगी खुद को साबित करने में ही गुजर जाती है। जहां तक मेरा सवाल है जब मैंने अपने गाने के शुरुआत की थी तब इतने सन साधन भी नहीं थे। मेरे घरवाले मेरे हर कदम पर साथ थे और मैंने भी कभी अपने परिवार की जिम्मेदारियों को नजर अंदाज नहीं किया। मुझमे धीरज के साथ मेहनत का माद्दा भी बहुत है। और मुझे लगता है हर औरत को इन दो चीजों पर भरोसा करना ही चाहिए। अगर धीरज के साथ पूरा परिश्रम किया जाए तो कामयाबी का सूरज निकल कर ही रहेगा। मैं सालों से गा रही थी, लेकिन कभी आपा धापी नहीं थी। मैं लगातार सीखती रहती हूं क्योंकि रियाज कभी नहीं छोड़ना चाहिए।

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आज मैं जहां भी पहुंची हूं तो उसी संयम और बैलेंस की वजह से जिसे मैंने हमेशा हर रिश्ते में बनाकर रखा। चाहे वह एक मां के रूप में हो, पत्नी के रूप में या फिर गायिका के रूप में। मैं आज यही कहती हूं कि सारे हसीन ख्वाब जो देखें है वह जरुर पूरे होंगे, लेकिन बैलेंस जरुरी है खासकर लड़कियों के लिए।

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