कहा जाता है कि भाजपा इतनी मज़बूत पार्टी है जिसपर बगावत का भी कोई असर नहीं पड़ता लेकिन हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव में ऐसा नहीं हुआ, यहाँ पर बागियों ने ही भाजपा का बेडा गर्क किया है और भाजपा से सत्ता कांग्रेस को शिफ्ट कराने में बड़ी भूमिका निभाई . बागी भले ही नहीं जीत पाए लेकिन भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवारों को हराने में ज़रूर सफल रहे हैं और ऐसी कम से कम 10 सीटें रहीं जहाँ विद्रोही उम्मीदवारों ने आधिकारिक उम्मीदवारों की हार को यकीनी बना दिया। बता दें कि हमाचल की 68 सीटों वाली विधानसभा में 18 पर भाजपा के विद्रोही उम्मीदवार मैदान में थे.
बागी कृपाल परमार ने प्रधानमंत्री की भी नहीं सुनी
चुनाव प्रचार के दौरान एक वीडियो बहुत वायरल हुआ था. इस वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी बागी कृपाल परमार को चुनाव में बैठने के लिए कहते सुनाई दे रहे थे लेकिन परमार ने अपना नामांकन वापस नहीं लिया और मैदान में डटे रहे थे, हालाँकि परमार को लगभग 28 सौ ही वोट मिले थे मगर उन्होंने भाजपा उम्मीदवार राकेश पठानिया के खिलाफ एक माहौल ज़रूर बना दिया था, यहाँ से कांग्रेस के भवानी सिंह पठानिया को जीत मिली थी.कहने का मतलब यह है अगर भाजपा अपने विद्रोहियों को मनाने में कामयाब हो जाती तो उसकी सीटों की संख्या 25 की जगह 35 हो सकती थी और वह अपनी सरकार बचाने में कामयाब हो सकती थी।
10 सीटों पर बगावत से हुआ नुक्सान
बता दें कि जिन 10 सीटों पर बागियों की वजह से भाजपा को हार का सामना करना पड़ा वहां विद्रोही प्रत्याशियों को मिला वोट भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवार के हार के अंतर से कहीं ज़्यादा रहा। कुल्लू विधानसभा क्षेत्र में बागी राम सिंह को 11790 वोट मिले जिसकी वजह से आधिकारिक उम्मीदवार नरोत्तम सिंह कांग्रेस के सुंदर सिंह ठाकुर से 4103 मतों से सीट गँवा बैठा, ऐसा ही ठियोग विधानसभा क्षेत्र, नालागढ़ सीट, किन्नौर विधानसभा, इंदौरा सीट, धर्मशाला में भी हुआ जहाँ भाजपा की बगावत का कांग्रेस को सीधा फायदा मिला.

