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इमामुल हक़ भी बने हैं नेपोटिज़्म के शिकार


इमामुल हक़ भी बने हैं नेपोटिज़्म के शिकार

इस्लामाबाद: पाकिस्तानी ओपनर इमाम उल हक ने उनके खिलाफ अक्सर इस्तेमाल किए जाने वाले भाई-भतीजावाद (नेपोटिजम) के तानों को लेकर चुप्पी तोड़ी है। पाकिस्तान के दिग्गज क्रिकेटर इंजमाम उल हक के भतीजे इमाम, जिनका वनडे क्रिकेट में औसत 53.84 का है, को अब भी आलोचकों द्वारा ‘पर्ची खिलाड़ी’ कहा जाता है।

इमाम ने जब टीम में जगह बनाई तो उनके चाचा मुख्य चयनकर्ता थे, इससे वह जब भी बैटिंग के लिए उतरते थे तो उन पर अतिरिक्त दबाव होता था। अपने 37 वनडे में सात शतक और छह अर्धशतक जमाने के बावजूद उन्हें अक्सर सोशल मीडिया में ट्रोल किया जाता है।

आलोचानाओं पर जवाब देते हुए कहा इमाम ने खुलासा किया कि वह डेब्यू करने से पहले ही शावर में रोया करते थे। उन्होंने ईएसपीएनक्रिकइंफो पर दीप दासगुप्ता से कहा, ‘जब ये सब होना शुरू हुआ, मैं अपना खाना अकेले खाया करता था। ये मेरा पहला दौरा था और आपको पता है कि पहला दौरा कैसे मिलता है। और जब भी मैं फोन खोलता था, तो लोग मुझे सोशल मीडिया में टैग कर देते थे या मुझे कुछ ऐसी चीजें भेजते थे। मैं बहुत निराश होता था और कुछ नहीं समझ सकता था।’

इमाम ने कहा, ‘मुझे याद है कि मैं शावर में घंटों रोता रहता था और मैं खेला तक नहीं था (वह अबू धाबी में सीरीज के पहले मैच में खेले थे)। युवा खिलाड़ियों के लिए खुद पर संदेह से घिर जाना बहुत आसान होका है। जो एक बात में मेरे दिमाग में चलती रहती थी, वह थी कि मैं अब तक खेला (भारतीय टीम के लिए) भी नहीं हूं। तो क्या होगा अगर मैं खेलता हूं और अच्छा प्रदर्शन नहीं करता हूं?’

इमाम ने कहा, ‘तो मेरा करियर खत्म हो जाएगा। मैंने अपने कमरे के बाहर एक कदम नहीं रखा, क्योंकि मुझे डर था कि बाहर लोग मुझे परेशान करेंगे क्योंकि दुबई में बड़ी संख्या में पाकिस्तानी समुदाय के लोग रहते हैं।’

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