गुजरात का खमण-ढोकला हो या बंगाल का रसगुल्ला फ़ूड लवर को तो हर चीज पसंद होती है तो आज हम आपको देश के विभिन्न शहरों में कुछ ऐसी खाऊ गलियां के बारे में बतायेगे, जिनके व्यंजन का स्वाद बेहद उम्दा है.
चटोरी गली, जयपुर

बापू बाज़ार के लिंक रोड के ठीक सामने वाली इस गली में खरीदारी के लिए भी बहुत कुछ है। यहां गोलगप्पे, छोले-भटूरे, फालूदा, छोले-टिक्की और तरह-तरह के पेय लोगों के पसंदीदा है। यहां के अलावा जयपुर में 50 किस्म की कचौरियां, एम.आई.रोड की लस्सी और जौहरी बाज़ार का घेवर हर दिल अज़ीज़ है।
सराफा बाज़ार, इंदौर

रात गहराते ही यहां के सराफा बाज़ार में खान-पान की दुकानें सजने लगती हैं जिनकी रौनक देर रात तक रहती है। भुट्टे का कीस और गराड़ू का स्वाद मालवा की ही देन है। इनके अलावा सराफा में मालपुआ,300 ग्राम वज़नी जलेबा, खोपरा पेटीस, रबड़ी-गुलाबजामुन, 10 फ्लेवर की पानी पुरी, कांजी वड़ा, दही बड़ा, पेठा, चाॅकलेट और फायर पान शहर को मध्यभारत की खान-पान राजधानी बनाता है। पारम्परिक व्यंजनों के अलावा चाइनीज़ से लेकर दक्षिण भारतीय लज़ीज़ व्यंजन यहां मिलते हैं।
कचौड़ी गली, वाराणसी

नाम सुनके ही मुँह में पानी आगया, दरअसल यहां अधिकांश दुकानें कचौड़ी की हैं इसलिए इसका नाम कचौड़ी गली पड़ गया। पहने इस मोहल्ले का नाम कूचा अजायब था। कहते हैं कि मुस्लिम शासन के रईस अधिकारी अजायब के नाम पर इसे यह नाम मिला था। कचाैरियों के अलावा बनारसी मिठाइयां, पान, बनारसी चाट, लौंग लता प्रसिद्ध है।
भुक्कड़ गली,अहमदाबाद

अहमदाबाद की इस गली में आपको देश और दुनिया के बेहतरीन व्यंजनों का स्वाद चखने को मिलेगा। यहां आपका यह भ्रम ज़रूर टूट जाएगा कि गुजराती लोग हर चीज़ में चीनी डालकर खाते हैं। यहां आपको तीखे, खट्टे और मसालेदार लज़ीज़ व्यंजन चखने को मिल जाएंगे। चाइनीज़, स्पैनिश, लैबनीज़, थाई के अलावा वन स्लाइस पिज्जा, तंदूरी मोमोज़ और फलाफल प्रसिद्ध हैं।
खाऊ गली, मुम्बई

मुम्बई में हर गली अपनी अलग ख़ासियत लिए हुए है। जैसे घाटकोपर की खाऊगली डोसे के लिए प्रसिद्ध है जिनमें आइसक्रीम डोसा और चीज़बर्स्ट डोसा ख़ास हैं। इसके अलावा पानीपुरी, सैंडविच, मसाला कोल्डड्रिंक और पावभाजी यहां की शान हैं। बांद्रा स्थित कार्टर रोड खाऊ गली में विभिन्न स्ट्रीट फूड का अपना ही मज़ा है। इसके अलावा महिम, एसएनडीटी लाइन, खारघर की खाऊगलियां भी प्रसिद्ध हैं।
लोकनाथ की गली इलाहाबाद

बात अगर चाट के जायके की हो तो लोकनाथ की गली भला कैसे भूल सकते है। शहर के पुराने जायकों की बात करें तो सुबह की शुरुआत जलेबी और कचौड़ी-दमालू से होती थी। चौक लोकनाथ की पूरी गली अपने खाने पीने की वस्तुओं और डिसेज के लिए वर्ल्ड फेमस है। इस एरिया में हरी नमकीन, राजाराम की लस्सी और निराला का चाट हो या बहादुरगंज में सुलाकी की चाट और मिठाईयां, कटरा में नेतराम की दुकान से लेकर दारागंज की लगभग सभी दुकानों पर लोगों की भीड़ लगी रहती है । शाम को शहर के सभी चौराहों, मोहल्ले के नुक्कड़ों पर चाट के ठेले लगते है ।

