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क्वांटिटी नहीं क्वालिटी पर ध्यान दे ICC

आर्टिकल/इंटरव्यूक्वांटिटी नहीं क्वालिटी पर ध्यान दे ICC

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तौक़ीर सिद्दीकी
टी 20 विश्व कप 2024 का लीग राउंड बस समाप्त होने वाला है, सुपर 8 में कौन सी आठ टीम पहुंचेंगी ये भी फाइनल हो चूका है. ये भी तय हो चूका है कि पाकिस्तान, न्यूज़ीलैण्ड और श्रीलंका का बोरिया बिस्तर बांध चुका है, सह मेज़बान यूएसए सुपर 8 में पहुँच चूका है, क्रिकेट प्रेमियों के लिए ये हैरानी भरी खबर है क्योंकि असोसिएट देशों में भी जो इस टूर्नामेंट में खेल रहे हैं यूएसए एक कमज़ोर टीम मानी जाती रही है. ख़ैर वो सुपर 8 में कैसे पहुंची इसका पोस्टमॉर्टेम आगे करेंगे लेकिन जहाँ तक लीग राउंड का मामला है और उसमें अमेरिकन चरण का मामला है, क्रिकेट के लिहाज़ से बहुत भयावह रहा है. अमेरिकन लेग में जिन वेन्यूज पर मैच खेले गए, वहां के मैदान, वहां की पिचें और वहां का मौसम, एक ऐसा सवाल उठाता है जो ICC को घेरता है, उसकी मंसूबा बंदी को घेरता है, उसके फिक्सचर पर सवाल उठाता है, उसकी योजनाओं पर ऊँगली उठाता है।

देख जाय तो ICC द्वारा आयोजित ये अबतक का सबसे ख़राब आयोजन अभी तक रहा है. क्रिकेट के प्रमोशन के चक्कर में और पैसा कमाने की दौड़ में पूरा लीग राऊंड बर्बाद करके रख दिया। आजकल तो मौसम विज्ञान इतना एडवांस हो गया है कि साल भर आगे की भविष्यवाणी की जा सकती है, फ्लोरिडा में बाढ़ जैसे हालत में मैचों का आयोजन, पिछले तीन मैच यहाँ पर वाश आउट हो गए और इस बात की पूरी सम्भावना है कि पाकिस्तान और आयरलैंड के बीच खेला जाने वाला मैच भी रद्द हो जायेगा और इस तरह इस मैदान पर लगातार चार मैच रद्द हो जायेंगे। इसका खामियाज़ा कौन भुगतेगा, ज़ाहिर सी बात है कि टीमें ही भुगतेंगी। ग्रुप ए की अगर बात करें तो अगर आज शाम पाकिस्तान और आयरलैंड का मैच भी बारिश की भेंट चढ़ गया जिसकी उम्मीद ज़्यादा है तो इस ग्रुप की सभी टीमें कम से कम एक एक मैच से हाथ धो बैठेंगी, आयरलैंड के साथ तो और भी सितम होगा, उसे चार में दो मैच गंवाने पड़ेंगे। ये तो किसी भी टीम के साथ नाइंसाफी कही जाएगी, उसे मैच भी न खेलने को मिलें और उसकी परर्फॉर्मन्स को भी जज किया जाय और कहा जाय कि यूएसए ने उससे बेहतर खेला।

देखा जाय तो यूएसए ने सिर्फ एक मैच अच्छा खेला, उसने पाकिस्तान को सुपर ओवर में हराया। देखा जाय तो पाकिस्तान को वो मैच जीतने का दो बार मौका था लेकिन उसने मौका गँवा दिया। खैर ये पाकिस्तान के लिए कोई नई बात नहीं, विश्व कप के मुकाबलों में वो पहले भी गुमनाम टीमों के खिलाफ मैच हारती रही है. यूएसए ने कनाडा को हराया, भारत से हार गया और आयरलैंड से मैच ही नहीं हुआ। मतलब सिर्फ दो मैच खेले और किस्मत ने सुपर 8 में पहुंचा दिया। यूएसए टीम की बड़ी तारीफ हो रही है लेकिन मेरे हिसाब से तो तारीफ पिच की होनी चाहिए जिसपर एक सुपर स्टार नाकाम और एक अंडर परफ़ॉर्मर सुपर स्टार बना है और बार बार बना है. इन घटिया पिचों पर कौन सी टीम जीतेगी कोई नहीं कह सकता। साउथ अफ्रीका दो बार अपसेट का शिकार होने से बाल बाल बची, कह सकते हैं किस्मत उसके साथ थी वरना 6 गेंदों पर सात बनाना नेपाल के लिए कोई बड़ा लक्ष्य नहीं था. यूएसए सुपर 8 में पहुँच गया है इसके लिए उसे बधाई, उसका असली इम्तेहान अब वेस्टइंडीज में होगा जहाँ उसे न्यूयोर्क की कृत्रिम पिचें नहीं बल्कि ओरिजिनल पिचें मिलेंगी।

ICC ने किस तरह का शेड्यूल बनाया इसपर तो बहुत बड़ा सवाल उठ रहा है, किसी एक ग्रुप के एक के बाद एक मैच बारिश की वजह से रद्द हो जांय तो सवाल उठना भी चाहिए। क्या ज़रूरी है विश्व कप जैसे टूर्नामेंट में इतने ढेर सारे असोसिएट देशों को शामिल किया जाय, क्या टीमों की संख्या बढ़ाने से क्रिकेट का विकास होता है, युगांडा जैसी टीम ने अपने चार मैचों में कितनी बार 50 से ज़्यादा स्कोर बनाया। ज़्यादा टीमों की वजह से टीमों चार ग्रुप में बाँट दिया गया. एक ग्रुप में पांच टीमें और सबको चार मैच. इनमें से कोई भी बड़ी टीम किसी मैच में अपसेट का शिकार हो जाय और मुख्य प्रतिद्वंदी से हार जाय और फिर एक मैच बारिश की भेंट चढ़ जाय तो वापसी नामुमकिन, इतने मैच ही नहीं कि कोई रिकवरी हो. ग्रुप ए में जो पाकिस्तान के साथ हुआ वो भारत के साथ भी हो सकता था. पाकिस्तान भारत के खिलाफ मैच जीत सकता था, अगर ऐसा हो गया होता और फिर यूएसए के खिलाफ उसका मैच रद्द हो गया, ऐसे में तो उसके पास भी सिर्फ चार अंक ही होते और उसके लिए सुपर 8 में पहुँचना मुश्किल हो गया होता।

बेशक असोसिएट देशों को ICC टूर्नामेंट में मौका मिलना चाहिए लेकिन इतनी ढेर सारी टीमों को एक साथ मौका मिलना उच्च लेवल की क्रिकेट के लिए कतई अच्छी बात नहीं। पूरे टूर्नामेंट का मज़ा बिगड़ जाता है. मेरा मानना है कि विश्व कप टूर्नामेंट में 12 से 14 टीमों से ज़्यादा नहीं होनी चाहियें और टीमों को सिर्फ दो ग्रुप में बाँटना चाहिए ताकि टीमों को ज़्यादा मैच मिले और प्रतियोगिता में वापसी करने का एक मौका भी. अगर आपके पास 6 मैच है तो दो मैचों में ख़राब प्रदर्शन के बाद या मैच रद्द होने के बावजूद आपके पास वापसी का मौका रहेगा लेकिन चार मैचों दो ख़राब गए, या रद्द हो गए तो टीम के लिए प्रतियोगिता में खेलना न खेलना बराबर। 37 साल बाद न्यूज़ीलैण्ड की टीम पहली बार ICC टूर्नामेंट में लीग दौर में बाहर होने जा रही है और इसकी वजह इस विश्व कप का प्रोग्राम है. हांलांकि आधिकारिक रूप से अभी वो टूर्नामेंट में मौजूद है लेकिन वेस्टइंडीज और अफ़ग़ानिस्तान से नेट रन रेट में वो इतना पीछे है कि उसका सुपर 8 में पहुंचना नामुमकिन सा है. न्यूज़ीलैण्ड की टीम एक मज़बूत और कंसिस्टेंट टीम है, उसकी पहचान पाकिस्तान जैसी नहीं है, पाकिस्तान के बाहर होने पर किसी को हैरानी नहीं हुई क्योंकि उसके साथ तो अक्सर ऐसा होता है लेकिन न्यूज़ीलैण्ड के लिए एक ख़राब मैच उस पर ये दाग़ लगा देगा। मेरे हिसाब से ICC को इस बारे में गौर करना चाहिए और भविष्य में क्वांटिटी की जगह क्वालिटी पर ही ध्यान केंद्रित करना चाहिए। क्रिकेट रहेगी तो पैसा रहेगा, क्रिकेट ही नहीं बचेगी तो पैसा कहाँ से आएगा। ICC को न्यूयोर्क और फ्लोरिडा जैसे वेन्यूज और आर्टिफीसियल पिचों से तौबा करनी चाहिए। अमेरिका जैसे देशों में क्रिकेट का विकास करना है तो दिव्पक्षीय श्रंखलाओं का आयोजन एक बेहतर विकल्प, विकास के चक्कर में विश्व कप को बर्बाद करना एक खतरनाक कदम होगा।

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