ढाका: प्रधानमंत्री कोरोना महामारी के काल में आज पहली बार विदेश यात्रा पर बांग्लादेश पहुंचे जहाँ वह बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की जन्म शताब्दी “मुजीब वर्ष” सहित अन्य कार्यक्रमों व समारोहों शामिल हुए। प्रधानमंत्री ने यहां ढाका स्थित नेशनल परेड ग्राउंड में राष्ट्रीय दिवस कार्यक्रम में शरीक हुए। यहाँ उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि उन्होंने 20-22 वर्ष की उम्र में बांग्लादेश के लोगों की आजादी के लिए सत्याग्रह किया था, उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की आजादी के लिए संघर्ष में शामिल होना मेरे जीवन के पहले आंदोलनों में से एक था।”
प्रकट किया आभार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन के शरुआत में कहा, “राष्ट्रपति अब्दुल हामिद, प्रधानमंत्री शेख हसीना और बांग्लादेश के नागरिकों का मैं आभार प्रकट करता हूं। आपने अपने इन गौरवशाली क्षणों में, इस उत्सव में भागीदार बनने के लिए भारत को सप्रेम निमंत्रण दिया।”
बंगबंधु को दी श्रद्धांजलि
उन्होंने कहा, “मैं सभी भारतीयों की तरफ से आप सभी को, बांग्लादेश के सभी नागरिकों को हार्दिक बधाई देता हूँ। मैं बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान जी को श्रद्धांजलि देता हूं जिन्होंने बांग्लादेश और यहाँ के लोगों के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया।” उन्होंने कहा, “मैं आज भारतीय सेना के उन वीर जवानों को भी नमन करता हूं जो मुक्तिजुद्धो में बांग्लादेश के भाइयों-बहनों के साथ खड़े हुए। जिन्होंने मुक्तिजुद्धो में अपना लहू दिया, अपना बलिदान दिया, और आज़ाद बांग्लादेश के सपने को साकार करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई।”
दिलचस्प संयोग का ज़िक्र
नेशनल परेड ग्राउंड में उन्होंने कहा, “ये एक सुखद संयोग है कि बांग्लादेश के आजादी के 50 वर्ष और भारत की आजादी के 75 वर्ष का पड़ाव, एक साथ ही आया है। हम दोनों ही देशों के लिए, 21वीं सदी में अगले 25 वर्षों की यात्रा बहुत ही महत्वपूर्ण है। हमारी विरासत भी साझी है, हमारा विकास भी साझा है।”
उद्यमियों को आमंत्रण
प्रधानमंत्री ने ये भी कहा, “मैं बांग्लादेश के 50 उद्यमियों को भारत आमंत्रित करना चाहता हूं। वे भारत आए हमारे स्टार्टअप से जुड़ें। हम भी उनसे सीखेंगे, उन्हें भी हमसे सीखने का अवसर मिलेगा।”
शहीदों को दी श्रद्धांजलि
इससे पहले पीएम मोदी ने सावर स्थित राष्ट्रीय शहीद स्मारक का दौरा किया और 1971 में बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई के शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

