Site icon Buziness Bytes Hindi

अब “भारत” से कैसे बचेगी भाजपा?

BJP

तौकीर सिद्दीकी

इंडिया अलायंस की दो दिवसीय मुंबई बैठक तीन ठोस प्रस्तावों और नेताओं के आपसी भाईचारे के प्रदर्शन के साथ समाप्त हुई। जहाँ तक बैठक की बात है तो दो बातें ख़ास रहीं। पहला यह कि विपक्ष का ये कुनबा और बड़ा हुआ है और दूसरा INDIA के साथ अब भारत भी जुड़ गया है क्योंकि बैठक में ये फैसला किया गया कि 15 सितम्बर से देश भर में शुरू होने वाले जनता से संवाद अभियान को ‘जुड़ेगा भारत, जीतेगा इंडिया’ के नारे के साथ शुरू किया जाएगा। आपको याद होगा कि जब विपक्ष ने अपने गठबंधन को INDIA (Indian National Developmental Inclusive Alliance) नाम दिया तो भाजपा की तरफ से कितना बवाल मचाया गया, यहाँ तक इंडिया बोलने से परहेज़ करने लगे. इंडिया को भारतीय संस्कृति से अलग करने लगे, संविधान से इंडिया शब्द को हटाने की मांग भी करने लगे थे. ऐसे में विपक्षी गठबंधन का ये नया नारा भाजपा को एक करारा जवाब माना जा सकता है.

खैर इंडिया अलायन्स की मुंबई बैठक की बात करें तो बैठक में जहां वरिष्ठ नेताओं को आगे रखा गया, वहीं युवा नेताओं की क्षमताओं और योग्यताओं को भी रेखांकित किया गया. इंडिया अलायन्स ने जो समन्वय समिति बनाई उसमें तेजस्वी यादव, राघव चड्ढा और अभिषेक बनर्जी जैसे युवा नेताओं को शामिल किया गया, जो और कमेटियां बनी हैं उनमें भी कई युवा चेहरे शामिल हैं. बैठक की एक ख़ास बात और रही , वो यह कि सभी पार्टियों ने सीट बंटवारे, प्रधानमंत्री पद या गठबंधन का संयोजक कौन बनेगा, इस मुद्दे पर कोई मतभेद सामने आने नहीं दिया। हालाँकि भाजपा पिछले दिनों से लगातार इस बात को उठा रही है कि विपक्षी गठबंधन का संयोजक कौन होगा, कौन प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनेगा। बैठक से इस मामले में भाजपा को निराशा ही हाथ लगी.

बैठक के दौरान ये साफ़ दिखा कि इंडिया अलायंस के नेता हर स्थिति के लिए तैयार नज़र आ रहे हैं, वो किसी भी संभावना को हल्के में नहीं ले रहे, वो समय से पहले चुनाव के लिए भी तैयार हैं जिसकी काफी बातें चल रही हैं, संसद का अचानक विशेष सत्र बुलाना इन अटकलों को और भी हवा दे गया. यही वजह है कि मुख्य समन्वय समिति के साथ अन्य समितियों का भी गठन कर दिया गया। ये समितियां गठबंधन के भविष्य के सभी राजनीतिक पहलुओं पर विचार कर एक रोडमैप तैयार करेंगी जिनमें सबसे ख़ास विभिन्न दलों के बीच राज्य स्तर पर सीटों का बंटवारा होगा जोकि एक पेचीदा मसला है क्योंकि कई राज्यों में कांग्रेस पार्टी और गठबंधन में शामिल मुख्य क्षेत्रीय पार्टी के बीच ही मुकाबला होता है. इन समितियों में मुंबई सम्मेलन में शामिल सभी 28 दलों को प्रतिनिधित्व दिया गया है।

जहाँ तक प्रधानमंत्री पद के चेहरे की बात है तो प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा को बैठक से बड़ा जवाब मिला। प्रधानमंत्री मोदी लगातार कहते रहे हैं कि वहां हर कोई प्रधानमंत्री बनना चाहता है. उस बात का जवाब देते हुए कहा गया कि इंडिया अलायन्स के पास कई योग्य चेहरे हैं जो प्रधानमंत्री बनने की काबिलियत रखते हैं, जबकि बीजेपी के पास सिर्फ एक ही नाम और एक ही चेहरा है. वहां कोई और नाम सामने आ ही नहीं सकता, अगर किसी नेता ने ऐसी हिम्मत दिखाई तो उसका राजनीतिक भविष्य अन्धकार में समझिये लेकिन इंडिया अलायन्स में ऐसा नहीं है.

इंडिया अलायन्स के मंच पर कम से कम 6 मुख्यमंत्री, कई पूर्व मुख्यमंत्री और कई वरिष्ठ नेता और कद्दावर नेता मौजूद थे, राहुल गांधी ने इस जमावड़े को ये कहकर नया आयाम दिया कि ये कबीले तारीफ बात है कि यहाँ मौजूद सभी वरिष्ठ नेता अपने मतभेदों को सुलझाने और एक-दूसरे को समायोजित करने के लिए किस हद तक जाने को तैयार हैं। ये इंडिया अलायंस की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी साफ नजर आया, सभी नेता एक दूसरे को आगे बढ़कर स्थान दे रहे थे.

प्रेस कॉन्फ्रेंस की सबसे दिलचस्प बात तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन का अपनी मातृभाषा तमिल में मीडिया को सम्बोधन रहा. यह भारत की विविधता को प्रदर्शित करता था और मीडिया ने भी बड़े धैर्य से उनको सुना। अपने सम्बोधन में स्टालिन ने 2024 में फासीवादी ताकतों के अंत की भविष्यवाणी की। पीएम मोदी पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने INDIA का बड़ा मज़ाक़ उड़ाया लेकिन INDIA का कुनबा बैठक दर बैठक लगातार बढ़ता जा रहा है. स्टालिन ने पीएम मोदी का इस बात के लिए शुक्रिया भी अदा किया कि वो अपने हर कार्यक्रम में INDIA का प्रचार कर रहे हैं.

तो INDIA की तरफ से पासे फेंके जा चुके हैं. अब देखना होगा भाजपा इसका किस तरह जवाब देती है, क्या नई रणनीति तैयार करती है क्योंकि जैसे हालात दिख रहे हैं उनको देखते हुए ऐसा लग रहा है कि अभी इस कुनबे में कई नए लोग भी जुड़ेंगे। बकौल राहुल गाँधी कि आज इस मंच पर जितनी पार्टियों के नेता बैठे हैं वो देश के 60 प्रतिशत लोगों का नेतृत्व कर रहे हैं, ऐसे में इंडिया अलायन्स को हराना अब एक तरह से नामुमकिन है. ‘जुड़ेगा भारत, जीतेगा इंडिया’ यानि INDIA और भारत को विपक्ष के इस गठबंधन ने अब एकसाथ रख दिया है। देखना होगा ‘INDIA’ को नकारने वाली भाजपा “भारत” को भी क्या नकारने की हिम्मत कर पायेगी।

Exit mobile version