रिलेशनशिप: अगर आप अपने बच्चे की जिद से परेशान हैं और आपको लगता है कि आपका बच्चा बहुत ज़िद्दी हो गया है वह आपकी बात नहीं सुनता और आपके हाँथो से निकलता जा रहा है। तो आप इस स्थिति में धैर्य से काम ले और उसे खुद से जोड़कर रखने का प्रयास करें क्योंकि जल्दबाजी का काम शैतान का होता है और अगर आप जल्दबाजी में कोई निर्णय लेते हैं और अपने बच्चे की इन हरकतों में उसके साथ कड़ा व्यवहार करते हैं तो वह आपके पास वापस आने की वजह आपसे और दूर हो जाएगा और आप दोनों के रिश्ते में खटास बरकरार रहेगी। लेकिन यदि आप धैर्य से काम लेते हैं तो आप अपने बच्चे की जिद भी कम कर सकते हैं और उसे खुद से जोड़कर भी रख सकते हैं। तो आइए जानते हैं वह टिप्स जिनसे आपका बच्चा होगा कम जिद्दी।
जाने कुछ आसान सी टिप्स जो कम करेंगी आपके बच्चे की जिद:-
बच्चे को समझने का करें प्रयत्न:-
हमने अक्सर देखा है अभिभाव अपनी बात तो अपने बच्चों को समझा देते हैं लेकिन उन्हें समझने की कोशिश नहीं करते। जब आप उन्हें समझने की कोशिश नहीं करते तो वह अपनी बात आपको समझने के लिए जिद का सहारा लेते हैं और इसके जरिए अपनी बात मनवाने का प्रयास करते हैं। इसलिए अभिभावकों को हमेशा अपने बच्चो को समझने का प्रयास करना चाहिए और उनके साथ मित्र की तरह रहना चाहिए।
उन्हें दे बेहतर सीख:
कई बार हमारा बच्चा जब कोई गलती करता है तो हम उसे समझाने की जगह उसको डाँट कर चुप करा देते हैं। लेकिन कई बार हमारी यह डाँट उसे काटने लगती है जिसके बाद उसे लगता है जब वह गलती करेगा तो हम उसे डांटने से ज्यादा और क्या कर लेंगे। यह सोच बच्चे को जिद्दी बनाती है और वह बार बार वही गलती दोहराता है। अभिभावकों को चाहिए कि जब आपका बच्चा कोई गलती करे तो आप उसे डांटे नहीं बल्कि उसे समझाए कि क्या सही है और क्या गलत वही उससे यह जानने की कोशिश करें कि आखिर उसने यह क्यों किया इससे अभिभावक और बच्चे के बीच एक अच्छा सम्बंध स्थापित होता है।
गुस्से पर रखे काबू:
कई अभिभावकों की आदत होती है कि वह अपना सारा गुस्सा अपने बच्चो पर निकाल देते हैं। घर मे भी जब वह किसी से गुस्सा होंगे तो उसका असर बच्चो पर दिखाई देता है। उनकी यह रोज रोज की गतिविधियां बच्चो को खूब प्रभावित करती है और बच्चा आपके इस गुस्से से जिद्दी बनता है। यदि आप इस प्रकार के अभिभावक है तो आप अपने गुस्से पर काबू रखें और बच्चो के साथ शान्त होकर बात करें।
बने उनकी ताकत:
अभिभावकों को हमेशा बच्चो की ताकत बनने की कोशिश करनी चाहिए। क्योंकि उनके अभिभावक ही उनके पहले मित्र होते हैं। जो अभिभावक अपने बच्चो की ताकत नहीं बनते उनके बच्चे समय के साथ जिद्दी हो जाते हैं और अपने पैरेंट्स से दूर रहने लगते हैं।