Site icon Buziness Bytes Hindi

सरकार और जनता कोराना के क़हर में कैसे कमाए !

नवेद शिकोह

आपदा में अवसर तलाशने की बात करने वाली सरकार और आम गरीब इंसान कोरोना काल में अपनी ढीली जेब को कैसे भारी करे इसका एक नायाब फार्मूला है। इस फार्मूले से कोरोना काल की गरीबी और बेरोजगारी के दौर में अपने पेट भरने का इंतजाम कर सकता है। और सरकार इस फार्मूले से कमजोर पड़े राजस्व को सहारा दे सकता है। और इस राजस्व से कोरोना काल में पीड़ितों की मदद की जा सकती है।

भारतीयों के पास जुगाड़ का फार्मूला हर मुश्किल का हल खोज लेता है। कोरोना का क़हर जान-माल दोनों का दुश्मन है। ऐसे मुश्किल दौर में गरीब आदमी की ही नही सरकार की भी जेब ढीली हो जाता है। सरकारी राजस्व बेहद कम हो जाता है।

रोज़ कुआं खोदने और रोज़ पानी पीने वाला गरीब मजदूर, रिक्शे वाले, खोमचे वाले मेहनतकश की रोजी-रोटी चली जाती है।

सरकार ने अपने राजस्व को गति देने के लिए आम जनता का भारी-भरकम चालान काटना तेज़ कर दिया है।

गरीब आदमी आपदा में अवसर को तलाशे, इसके लिए एक आइडिया है- गरीब बेरोजगार दो-दो रुपए वाले मास्क लेकर उस जगह खड़ा हो जाए जहां से चंद कदम दूरी पर मास्क ना लगाने वालों की गाड़ियां रोक कर उनका चालान काटा जा रहा है। गरीब बेरोजगार बिना मास्क लगाए लोगों की गाड़िया पुलिस चेकिंग स्थल से पहले ही रोक दे। और बताए कि आगे पांच सौ रुपए का चालान कटने से बेहतर है कि आप मुझसे बीस रुपए का मास्क खरीद कर जिन्दगी भी बचा लें और पांच सौ रुपए भी। और चालान से बच जाएं।

इसी तरह सरकार के लिए भी नायाब फार्मूला-

लापरवाह आम लोगों का चालान काट के बूंद-बूंद से राजस्व का सागर भरने वाली पुलिस से कमाई करवाने वाली सरकार चाहे तो बूंद-बूंद से राजस्व का सागर तो भरे ही साथ ही बड़ी दौलत के पूरे सागर से एक बार में राजस्व भर का ख़जाना भर दे।

कोरोना की वापसी के बाद भी कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव के लिए सैकड़ों रैलियों में लाखों लोगों को भीड़ को इकट्ठा किया गया। कोरोना को फैलाने वाली इस जमात के लाखों लोगों का चालान काटा जाए और इनसे आर्थिक दंड वसूला जाए। इस अरबों रुपयों का राजस्व प्राप्त किया जा सकता है। और ऐसी रैलियों को संबोधित करने वाले नेताओं का भी चालान काटा जाए। जो नेता जितना बड़ा हो उससे उतनी रकम वसूली जाए। उसकी फॉलोइंग का आंकलन कर उससे उतनी ही रक़म प्राप्त की जाए। ये सारी राशि कोरोना राहत फंड के जरिए महामारी में भुखमरी का शिकार गरीबों की मदद के काम आए।

मसलन रैली में भीड़ एकत्र करने वाले किसी बड़े राष्ट्रीय नेता की सोशल मीडिया में बीस-तीस करोड़ की फॉलोइंग है तो उससे उतने ही रुपए की रकम का आर्थिक दंड दिया जाए।

इस तरह गरीब इंसान और सरकार आपदा में अवसर को तलाश सकती है।

मेरे इस आइडिया से कमाने वाले कमाई का एक हिस्सा मुझे ज़रूर दें। नहीं तो हराम में मेरे आइडिए का उपयोग करने के जुर्म में आपका चालान कट जाएगा।

Exit mobile version