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अस्पतालों के बेड बढ़ेंगे, श्मशानों के प्लेटफार्म तैयार


अस्पतालों के बेड बढ़ेंगे, श्मशानों के प्लेटफार्म तैयार

कोविड संक्रमित बीमारों के इलाज और मृतकों के अंतिम संस्कार की दिक्कतों की फिक्र में यूपी सरकार अहम फैसले ले रही है। जिसके तहत मरीजो के इलाज के लिए कम पड़ रहे संसाधनों को बढ़ाने के आदेश हुए हैं तो मरने वालों के अंतिम संस्कारों की दिक्कतों को दूर करने की कोशिशें जमीन पर नजर आ रही हैं।
लखनऊ के श्मशान घाटों में लाशों की कतारों की लम्बी वेटिंग से निपटने के लिए नगर निगम ने युद्ध स्तर पर इंतेज़ाम किए है। खराब विधुत शवगृह मशीन ठीक करवा ली गई है। पांच नई मशीने भी कुछ दिनों में लग जाएंगी। लकड़ियों की कमी को पूरा करने के लिए दूसरे जिले से लकड़िया मंगवाकर तरतीब से एंडवास कई-कई प्लेटफार्म पर लकड़ियां रख दी गई हैं। कई नये प्लेफॉर्म तैयार हो गए हैं। लखनऊ के मुख्य शमशान घाट गुलाला और भैसाकुंड में पिछले कई दिनों से अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को लम्बा इंतजार और तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिसे दूर करने के लिए नगर निगम ने अब रात को ही बड़ी संख्या में कई चिताएं जलाने की एंडवास तैयारी कर ली है। ताकि बहुत लम्बे इंतेजार और लाशों की कतारें ना लगें।

कोविड के कहर से पैदा हुई मौतों की आंधी में अंतिम संस्कार की दिक्कतों को दूर करने की कोशिश अमली सूरत में नजर आने लगी है। लेकिन कोविड के शिकार बीमारों के इलाज की समुचित व्यवस्था में कितना समय लगता है ये वक्त ही बताएगाः

एरा मेडिकल काॅलेज, टी.एस. मिश्रा मेडिकल काॅलेज तथा इण्टीग्रल मेडिकल काॅलेज को पूर्ण रूप से डेडीकेटेड कोविड अस्पताल के रूप में परिवर्तित किए जाने का फैसला किया। बलरामपुर अस्पताल में तीन सौ बेड का डेडीकेटेड कोविड अस्पताल शुरू करने का फैसला किया।

महामारी के इस प्रकोप में समुचित इलाज की तमाम कमियों को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री ने दर्जन भर से ज्यादा बड़े फैसले लिए है और अधिकारियों से इन्हें क्रियान्वित करने के निर्देश दिए है। अब देखना है कि ये तमाम फैसले कब तक अमल में आते हैं और जमीन पर नजर आते हैं।

फिलहाल शमशानों घाटों में लाशों की क़तारों की लम्बी वेटिंग की दिक्कतों को दूर करने की कोशिशें तो अमली तौर पर दिखाई देने लगी हैं।

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