Hockey Player Mumtaz: हॉकी के मैदान में बन गई ‘मुमताज’

स्पोर्ट्सHockey Player Mumtaz: हॉकी के मैदान में बन गई ‘मुमताज’

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Zeba Hasan 

मुमताज जब घर से हॉकी खेलने के लिए निकली तो कहीं उसकी मां को ‘लड़की को लड़का ना समझो’ का ताना मिला तो कोई मुमताज से कहता इस खेल में क्या रखा है। इन बातों का परवाह ना तो मुमताज के परिवार ने की और ना ही मुमताज ने। सदर की गलियों मे सब्जी बेचकर जिंदगी जीने वाले परिवार की बेटी ने हॉकी की दुनिया में खुद को मुमताज साबित कर दिया है। हाल ही में साउथ अफ्रीका में हुए जूनियर हॉकी विश्वकप के सेमी फाइनल तक पहुंचने वाली टीम में मुमताज (Hockey Player Mumtaz) के प्रदर्शन ने सभी का दिल जीता है। उन्हें टीम ने वर्ल्डकप की ट्रॉफी भले ही नहीं जीता लेकिन टीम की परफॉरमेंस की सभी ने तारीफ की। बुधवार को साउथ अफ्रीका एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए निकल रही मुमताज से हुई यह खास बातचीत।

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आगरा रनिंग करने के लिए गई थी

बचपन से ही हॉकी में मेरी रुचि थी और स्कूली दिनों में मैं रनिंग किया करती थी। मेरे परिवार में तमामा परेशानियां थीं लेकिन तमाम परेशानियों के बाद भी परिवार ने पूरा सहयोग दिया। 2011 में आगरा में एक दौड़ में हिस्सा लेने गई थी। उसी दौड़ में हॉकी कोच नीलम सिद्दीकी की नजर मुझपर पड़ी। उन्होंने पापा से मुझे हॉकी खिलवाने की सलाह दी और पापा ने भी उनकी बात मान ली। 2014 में लखनऊ हॉस्टल में प्रवेश मिलने के बाद मैंने नीलम सिद्दीकी मैम से प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया। मुमताज बताती हैं कि जूनियर नेशनल में यूपी की टी’म में शानदार प्रदर्शन के लिए बतौर इनाम मेरा चयन थाईलैंड में होने वाली अंडर-18 एशिया कप के लिए हिंदुस्तान की टीम ( Indian Team) में हो गया। इसके बाद 2017 में ऑस्ट्रेलिया, 2018 में नीदरलैंड और बेल्जियम में जूनियर हॉकी में हिस्सा लेने का गौरव मिला। मुमताज बताती हैं कि अर्जेंटीना में यूथ ओलंपिक 2018 में जूनियर भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। खिताबी मुकाबले में भले ही हम अर्जेंटीना से हार गए, पर इस खिताबी मुकाबले का एकमात्र गोल खेल के 40वें सेकंड मे मैंने ही किया था। हालांकि पूरे टूर्नामेंट में मैंने 12 गोल किए थे।

उस फीलिंग के लिए शब्द नहीं हैं

प्लेन में तो बहुत बार बैठी हूं लेकिन जिस वक्त वल्डकप खेलने के लिए फ्लाइट में बैठी हूं उस वक्त जो फ़ील  कर रही थी शायद उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकती हूं। बस उस वक्त एक ही सोच थी कि देश का नाम रोशन करना है। जितना भी सीखा है आज उसके प्रदर्शन का वक्त आ गया है बस मुझे मैदान में अपना सौ प्रतिशत देना है। और मैंने किया भी ऐसा ही था। भले ही हम सेमीफाइनल से आगे नहीं जा पाए लेकिन हमारी टीम की परफॉरमेंस की तारीफ हुई। क्वार्टर फाइनल मुकाबले में खेल के 11वें मिनट में साउथ कोरिया के खिलाफ मैंने गोल दागा था। इस मैच में हमने कोरिया को 3-0 से शिकस्त दी थी। लेकिन सेमीफाइनल हम नहीं जीत पाए। लेकिन इस दौरान मैंने बहुत कुछ सीखा है और अब और मेहनत करनी है और कुछ भी हो अपने देश का नाम रोशन करना है।

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जहां भी हूं अपने परिवार की वजह से हूं

इंडियन ऑयल में हॉकी प्लेयर्स के लिए वैकेनसी निकली थी हॉकी के 15 प्लेयर्स का सिलेक्शन हो गया है मुझे इस मैच के बाद जॉइन करना था सो मैं 14 को जॉइन करूंगी। मेरा मेडिकल होना बाकी है। इसके साथ मैं ग्वालियर यूनिवर्सिटी (Gwalior University) से बीए कर रही हूं सेकेड ईयर है मेरा। पढ़ाई भी साथ साथ करती रहूंगी। जैसे ही मेरी पहली सैलेरी मिलेगी मैं अपनी पूरी सैलिरी अपनी मां, भाई बहनों को दूंगी क्योंकि आज मैं जो भी हूं, जहां तक पहुंची हूं अपने परिवार की वजह से ही हूं।

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