बिज़नेस बाइट्स सीरीज 1 (History Of Gyanwapi Buzinessbytes Series 1)
पारुल सिंघल
History Of Gyanwapi Buzinessbytes Series 1 -अयोध्या में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद मामला सुर्खियों में है। राम मंदिर विवाद की तरह ही काशी का ये विवाद 350 वर्ष पुराना है। जबकि बीते तीन दशक से इसकी कानूनी लड़ाई जारी है। हाल ही में वाराणसी कोर्ट ने ज्ञान व्यापी मस्जिद परिसर में हिंदुओं को नियमित पूजा अर्चना की अनुमति देते हुए फैसला सुनाया। क्या है काशी का ज्ञानवापी मस्जिद विवाद…… बिजनेस बाइट्स अपनी इस विशेष सीरीज में लाया है ज्ञानव्यापी मस्जिद से जुड़ी वह सारी जानकारी जो आप जानना चाहते हैं। 350 वर्षों का इतिहास, मंदिर -मस्जिद बनने का सिलसिला, को लेकर किया जा रहे दावों के साथ ही अब तक इसमें क्या क्या हुआ है। इसकी पहली सीरीज में हम आपको बताने जा रहे हैं ज्ञान व्यापी मस्जिद परिसर को लेकर हिंदुओं की तीन प्रमुख मांगें और क्यों है इस पर विवाद….
बाबा शिव के धाम वाराणसी में ज्ञानव्यापी मस्जिद मुगलों द्वारा बनाई गई थी यह दावा किया जाता है कि 1664 में औरंगजेब ने इसका निर्माण करवाया था। मुगलकालीन किताब मआसिर-ए – आलमगीरी में कहीं जिक्र मिलता है कि औरंगजेब ने मंदिर तोड़कर इस मस्जिद का निर्माण करने के आदेश दिए थे। कोलकाता की एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल में यह किताब मौजूद है। जिसे अरबी भाषा में साकी मुस्तैद खान ने लिखा था। यही इस विवाद की मूल जड़ है। यानी हिंदुओं का मानना है कि यह मस्जिद मंदिर तोड़कर बनाई गई थी।
मंदिर के टूटे हुए अवशेषों का प्रयोग मस्जिद के निर्माण में हुआ था। किताब के मुताबिक सैकड़ो वर्ष पहले इस जगह पर प्रभु विश्वेश्वर का स्वयंभू ज्योतिर्लिंग स्थापित हुआ था। इस ज्योतिर्लिंग के आसपास सम्राट विक्रमादित्य ने एक मंदिर का निर्माण भी कर दिया था। लोग यहां भगवान शिव के स्वयंभू ज्योतिर्लिंग की पूजा अर्चना वर्षों से करते चले आ रहे थे। जिसे देख इस मंदिर को भव्य रूप देने का काम राजा टोडरमल ने किया। वह अकबर के नवरत्नों में शामिल थे। इस मंदिर की भव्यता की अलग ही कहानी थी। इसके बाद औरंगजेब का शासन हुआ। वह क्रूर शासक था। उसने इस मंदिर को वर्ष 1664 में तोड़कर मस्जिद बनाने का आदेश दिया। बाद में वर्ष 1735 में रानी अहिल्याबाई ने काशी विश्वनाथ मंदिर का दोबारा निर्माण करवाया था। वहीं कुछ दावों में यह भी कहा गया है कि मुगल बादशाह अकबर ने दीन-ए-इलाही नाम से मज़हब शुरू किया था। जिसके तहत ही इस मस्जिद का निर्माण करवाया गया था।
1919 में कोर्ट पहुंचे थे विश्वेशर
ज्ञानवापी मंदिर – मस्जिद परिसर पर अब कानूनी लड़ाई जारी है। हिंदू और मुस्लिम पक्ष अलग-अलग दावों के साथ यह लड़ाई लड़ रहे हैं। स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर की ओर से पहली बार वर्ष 1919 में याचिका दायर की गई थी। वाराणसी कोर्ट में ज्ञानवापी परिसर में पूजा अर्चना करने की अनुमति को लेकर याचिका डाली गई थी। इस परिसर को लेकर हिंदुओं द्वारा तीन प्रमुख मांगे रखी गई हैं। जिन लगातार बहस जारी है। हिंदू पक्ष की पहली मांग है कि पूरे ज्ञानवापी परिसर को काशी मंदिर का हिस्सा घोषित किया जाए इसके लिए अदालत में अपील की गई दूसरी मांग के तहत हिंदू पक्ष का कहना है कि यहां बनी मस्जिद को ढहाए जाने के आदेश अदालत द्वारा जारी किये जाएं, साथ ही यहां मुसलमानों के आने पर प्रतिबंध लगाया जाए। हिंदुओं की तीसरी मांग है कि उन्हें मंदिर के पुनर्निर्माण की अनुमति दी जाए। इस विवाद को लेकर लगातार कानूनी लड़ाई जारी है
अगली सीरीज में जानिए, ज्ञानवापी मामले में आगे क्या क्या हुआ
