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वाराणसी में हिंदू भी दफनाते हैं दिवंगतों के शव


वाराणसी में हिंदू भी दफनाते हैं दिवंगतों के शव

लहरतारा स्थित कब्रिस्तान को कहते हैं हिंदुओं का कब्रगाह
सैंकड़ों साल से निभाई जा रही है शवों को दफनाने की परंपरा

वाराणसी। हिंदूओं का कब्रिस्तान! आपको भी आश्चर्य हुआ होगा लेकिन यह सत्य है। वाराणसी जिसे धर्म नगरी भी कहा जाता है वहां एक कब्रिस्तान ऐसा भी है जहां सिर्फ हिंदूओं के शव दफनाये जाते हैं। यहां के लहरतारा स्थित कब्रिस्तान में सैंकड़ों सालों से हिंदूओं द्वारा परिवारजनों के दिवंगत हो जाने के बाद उनके शवों को दफनाया जा रहा है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि अनुसूचित जाति और कबीर पंथी समाज के लोग इस कब्रिस्तान में अपने मृत परिजनों के शव को दफनाते हैं। यहां की कब्रों पर लगे शिलापट्ट को देखकर इस बात की तस्दीक होती है कि यह परंपरा सैंकड़ों साल से चली आ रही है।


प्रयागराज और उन्नाव में दफनाये गये शवों को लेकर जहां विपक्ष सरकार पर हमलावर है वहीं समाज के एक वर्ग का कहना है कि हिंदू धर्म का पालन करते हुए भी उनके यहां शवों को दफनाने की परंपरा है। भू समाधि, जल समाधि, अग्नि समाधि और कई जगहों पर बर्फ में दफनाने की भी प्रथा है। इस बात की तस्दीक करता है वाराणसी के लहरतारा स्थित कब्रिस्तान जहां कब्रों पर लगे शिलापट्ट पर हिंदूओं के नाम, जन्मतिथि व मृत्यु की तारीख लिखी है। सैंकड़ों साल पुराने कब्रिस्तान में हिंदू धर्म के लोग अपने मृत परिजनों के शव को दफना कर परंपरा का निर्वहन करते हैं।

क्षेत्रीय लोगोें का कहना है कि इस कब्रिस्तान में अनुसूचित जाति और कबीर पंथी समाज से संबंधित मृतकों के शव को दफनाया जाता है। सैंकड़ों साल से यह परंपरा चली आ रही है। इस संबंध में धर्मगुरूओं का कहना है कि हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार अनेक पद्धितियों से किया जाता है। भू समाधि, जल समाधि, अग्नि समाधि के अलावा कई संप्रदायों में बर्फ में शव दफनाने की भी परंपरा है। इस पर किसी भी प्रकार का संशय या विवाद की गुंजाईश नहीं है।

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