Gujarat Chunavi Dangal: गुजरात जहाँ के मौसम का सियासी पार चढ़ चुका है पक्ष विपक्ष लागातार एक दूसरे पर अपने शाब्दिक बाणों से कटाक्ष कर रहे हैं। वही अगर हम भाजपा की बात करे तो इसने विगत 30 वर्षों से गुजरात की बागडोर सम्भाल रखी है। गुजरात मे मोदी नाम सिर्फ एक नाम नहीं बल्कि हिंदुत्व का वह कार्ड है जिसके सामने विपक्ष के पत्तें कई बार छोटे साबित हुए हैं। गुजरात की राजनीति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि एक कट्टर हिन्दू नेता के रूप में विख्यात है लेकिन पिछले आठ वर्ष में मोदी ने अपनी कट्टर हिन्दू की छवि में परिवर्तन किया है और आज उनको लोग विकास पुरुष के रूप में जानते हैं। वही अगर हम इस बार के परिदृश्य से गुजरात के राजनीतिक गाँठजोड को समझे तो अब गुजरात की राजनीति में जातीय राजनीति की एंट्री हुई है और पक्ष विपक्ष दोनो ही इसी रास्ते पर चलते हुए अपने लक्ष्य को भेदने की कवायद में लगे हैं। वर्षो पहले गुजरात मे केशुभाई पटेल ने जातिय समीकरण बनाकर चुनावी मैदान में हलचल मचाई थी अब 2022 में पुनः वही परिदृश्य देंखने को मिल रहा है और गुजरात मे भाजपा व कांग्रेस दोनो केशुभाई की चुनावी रणनीति को नए सिरे से लागू कर जनता का दिल जीतना चाह रहे हैं।
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सॉफ्ट हिन्दू या जातिवाद:- अगर हम सॉफ्ट हिंदुत्व की राजनीति को देखे तो यह भाजपा का पुराना दांव रहा है और काफी लोकप्रिय भी है भाजपा ने अपने इस दांव के बलबूते पर कई दफा गुजरात से लेकर अन्य कई राज्यों में अपनी फतेह का ध्वज लहराया है। लेकिन गुजरात मे इस बार भाजपा नया कार्ड खेलने की तैयारी में है जाति के नाम पर भाजपा न सिर्फ नया दांव खेलेगी और जातीय गाँठजोड बनाकर जनता को अपनी ओर आकर्षित करेगी।
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लेकिन राजनीति विशेषज्ञयों का कहना है कि कांग्रेस का तो जातिय राजनीति पर काफी लंबे समय से दबदबा रहा है लेकिन भाजपा की छवि एक हिंदूवादी पार्टी के रूप में बनी हुई है अब ऐसे में अगर भाजपा जातीय समीकरण तैयार करके मैदान में उतरती है तो यह उसके लिए घातक भी साबित हो सकता है और गुजरात मे जातीय राजनीति की मार भाजपा को कई साल पीछे धकेल सकती है। वही अगर हम कांग्रेस के परिदृश्य में बात करे तो भाजपा का यह दाव कांग्रेस के लिए लाभदायक साबित हो सकता है और गुजरात मे कांग्रेस को इससे जीत की तरफ बढ़ने में pmमदद करेगी।

