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कोरोना काल में वर्चुअल तरीके से मन रहा हिंदी दिवस


कोरोना काल में वर्चुअल तरीके से मन रहा हिंदी दिवस

पारुल शुक्ला

कोरोना काल होने की वजह से इस बार हिंदी दिवस को वर्चुअल तरीके से मनाया जा रहा है. लोगों ने व्हाट्स एप स्टेटस, मैसेज और सोशल मीडिया का यूज करके लोग एक दूसरे को शुभकामनाएं दे रहे हैं.हर बार वृहद स्तर पर होने वाले कार्यक्रम इस बार कोरोना वायरस की वजह से नहीं हो सके. भारत की बात की जाए तो केवल 43.63 प्रतिशत लोग ही हिन्दी बोलते हैं.जबकि पूरी दुनिया में हिन्दी चौथी ऐसी भाषा है, जो सबसे ज्यादा लोग बोलते हैं. ताजा आकंड़ों के मुताबिक पूरी दुनिया में 80 करोड़ लोग ऐसे हैं जो हिन्दी बोलते है. आज हिंदी दिवस के अवसर पर हम आपकों डॉक्टरों के बारे में बताने जा रहे हैं जो हिंदी को बढ़ावा देने के लिए हिंदी में पर्चा लिखते हैं.

हिंदी में लिखने से समझ में आने लगे डॉक्टर के पर्चे
डॉक्टरों की लेखनी की बात की जाए तो आप तुरंत यही कहेंगे. इतना जटिल तो आम आदमी कैसे समझ सकता है. कभी-कभी तो मेडिकल स्टोर वाले भी नहीं समझ पाते और डॉक्टर से फोन करके जानकारी लेते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि हिंदी के दिनों-दिन और ऊंचे होते कद को आैर बढ़ाने की मुहिम में डॉक्टर भी शामिल हो रहे हैं.अब कई डॉक्टरों ने हिंदी में ही दवा के पर्चे बनाने की मुहिम छेड़ दी है। इस मुहिम की शुरुआत उत्तर प्रदेश के नोएडा से शुरू हुई है.

चीन के डाॅक्टर अपनी भाषा में लिखते तो हम क्यों न लिखे
नोएडा के सेक्टर-30 में स्थित जिला अस्पताल के डाॅक्टर संतराम वर्मा कहते हैं कि वह ओपीडी में पर्चे पर जांच और दवाएं हिंदी में ही लिखते हैं ताकि मरीजों को भी समझ आए कि उन्हें क्या दवा और जांच लिखी है. जब मरीज ओपीडी में आता है तो वह कहता है कि उसे हिंदी में ही दवा लिख दीजिए ताकि कोई परेशानी न हो.उनका साफ कहना है कि अगर चीनी डॉक्टर अपनी राष्ट्र भाषा में पर्चा बना सकते हैं तो भारतीय डॉक्टर हिंदी में क्यों नहीं लिख सकते.
डॉ. संतराम ने बताया कि उनकी मुहिम में कुछ और डॉक्टर भी शामिल हुए हैं और उन्होंने भी हिंदी में पर्चे बनाने शुरू कर दिए हैं.जिला अस्पतालों में आने वाले अधिकांश मरीज ग्रामीण इलाकों के होते हैं. हिंदी में पर्चा होने पर उन्हें भी बार-बार डॉक्टर से कुछ पूछने की जरूरत नहीं पड़ती है. आइए अब जानते हैं हिंदी से जुड़े कुछ और रोचक तथ्य…

14 सितंबर, 1949 में हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिलने के बाद 1953 से पूरे देश में हिंदी दिवस मनाया जाने लगा.

और कौन-कौन से देशों में बोली जाती है हिंदी?

नेपाल: भारत के बाद नेपाल दूसरा ऐसा देश है जहां सबसे ज्यादा हिन्दी बोली जाती है. यहां हिन्दी के साथ ही नेपाली और भोजपुरी भी बोली जाती हैं.

अमेरिका: अमेरिका में हिन्दी भाषी लोगों का तीसरा सबसे बड़ा समूह है. देश में लगभग 6 लाख लोग इस भाषा को बोलते हैं.अमेरिका में हिन्दी 11 वीं सबसे पॉपुलर विदेशी भाषा है.

पाकिस्तान: भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी हिन्दी भाषा का इस्तेमाल किया जाता है. वैसे तो यहां अंग्रेजी और उर्दू को ऑफीशियल भाषाओं में शामिल किया गया है पर यहां पंजाबी, सिंधी, पास्तो, बलूची और हिन्दी भाषाएं भी बोली जाती हैं.

बांग्लादेश: यहां की ऑफीशियल भाषा तो बंग्ला है। पर यहां इंग्लिश के साथ हिन्दी भी बोली जाती है.

फिजी: यह एक छोटा सा देश है पर यहां चार ऑफीशियल भाषाएं बोली जाती हैं जिनमें से हिन्दी भी एक है. यहां नदरोगा भाषा भी बोली जाती है.

सिंगापुर: इस देश में भी कई लोग हिन्दी बोलते है. वैसे तो यहां कि ऑफीशियल भाषा माले और अंग्रेजी है. पर यहां तमिल, मेंड्रेन के साथ हिन्दी भी बोली जाती है.

साउथ अफ्रीका: साउथ अफ्रीका में अंग्रेजी और अफ्रीकन ऑफीशियल भाषा है. पर यहां अन्य कई क्षेत्रिय भाषाओं के साथ हिन्दी भी बोली जाती है.

मॉरीशस: मॉरीशस के एक तिहाई लोग हिन्दी भाषा बोलते हैं.यहां अंग्रेजी और फ्रेंच आधिकारिक भाषा हैं. अधिकांश मॉरीशस के लोग क्रियोल भाषा भी बोलते हैं.

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