हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 : सरकारें आईं और गईं लेकिन विदेशी सेब आयात का मुददा जस का तस

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शिमला। हिमाचल प्रदेश में दशकों से सरकारें आतीं रहीं और जातीं रहीं। लेकिन हिमाचल प्रदेश में विदेशी सेब पर आयात शुल्क बढ़ाने का मुददा जस का तस ही रहा। यह मुददा दशकों बाद भी नहीं सुलझ सका। वर्ष एक दशक से भी अधिक समय से मामला लगातार उठाते आ रहे हिमाचल प्रदेश के बागवानों को आज भी राहत का इंतजार है। विदेशी सेब का आयात अब भी लगातार बढ़ता जा रहा है। अफगानिस्तान के रास्ते से ईरान के सेब की मार हिमाचली सेब पर अधिक पड़ रही है। प्रदेश के बागवान सेब पर आयात शुल्क 100 प्रतिशत तक करने के लिए सरकार पर दशकों से दबाव बना रहे हैं। हिमाचल में हर साल सेब का करीब पांच हजार करोड़ रुपये का कारोबार होता है। प्रदेश की अर्थ व्यवस्था पर सेब की अहम भूमिका है। अधिकांश बागवानों की कमाई का जरिया सेब पर ही टिका है। विदेशी सेब ने हिमाचल के बागवानों के सामने कई चुनौती खड़ी की है। बड़ी मात्रा में विदेशी सेब आने से हिमाचली सेब को अच्छा भाव नहीं मिल पा रहा है।

देश में विश्व भर के करीब 44 देशों से सेब का आयात प्रतिवर्ष होता है। इन देशों में टर्की,ईरान, वाशिंगटन, चिली, फांस, इटली और न्यूजीलैंड प्रमुख हैं। चीन से सेब का आयात होता था लेकिन अब रोक लगी है। इन सभी देशों में सेब पर पचास प्रतिशत आयात शुल्क लगाया है। वाशिंगटन में सेब पर आयात शुल्क 75 प्रतिशत तक है। वाशिंगटन के सेब पर आयात शुल्क वर्ष 2018 में बढ़ा था।

बागवानों के प्रतिनिधि कहते हैं कि विश्व व्यापार संगठन के समझौते के मुताबिक आयात शुल्क 75 प्रतिशत तक लगाया जा सकता है। सेब में सिर्फ 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगा है। माना जा रहा है कि अगर सेब पर आयात शुल्क 100 प्रतिशत कर दिया जाए तो इससे हिमाचली सेब के सामने विदेशी सेब की चुनौती काफी कम होगी।

बागवानों के प्रतिनिधि सेब पर आयात शुल्क बढ़ाकर सौ प्रतिशत करने का मामला केंद्र और राज्य सरकारों के सामने उठाते रहे हैं। पूर्व केंद्रीय वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा से सेब पर आयात शुल्क बढ़ने का मामला उठाया था। इसके बाद केंद्र में भाजपा सरकार से यह मामला लगातार उठाया जाता रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर भाजपा नेता जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर से इस मामले में मांग की जा चुकी है। लेकिन अभी तक राहत नहीं मिली हैं।

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