हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के नाम पर हाई लेवल की धांधली

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हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के नाम पर हाई लेवल की धांधली

तय दरों से चार गुना अधिक वसूले जा रहे वाहन स्वामियों से
अव्यवस्था और भ्रष्टाचार के चलते योजना को लग रहा पलीता

न्यूज डेस्क। वाहन चोरी पर लगाम लगाने, चोरी किये वाहनों की नंबर प्लेट बदल कर बेचने जैसी समस्याओं से वाहन स्वामियों को निजात दिलाने और नंबर प्लेट से वाहन के बारे में पूरी जानकारी प्रदान करने की योजना के अन्र्तगत वाहनों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाना अनिवार्य किया गया था। मगर इस महत्वाकांक्षी और महत्वपूर्ण योजना में छाये भ्रष्टाचार ने योजना के उद्देश्य को पूरा करने में रोड़ा अटका दिया है। तय दरों से चार गुना तक अधिक वसूली किये जाने के कारण वाहन स्वामियों को हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाने में हिचकिचाहट हो रही है। उधर वाहन स्वामियो को समयनुसार हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट न लगवाने पर आरटीओ से संबंधित कार्य न किये जाने और चालान काटे जाने की चेतावनी भी दी जा रही है।

वर्तमान में वाहनों पर लगी नंबर प्लेटों को आसानी से बदला जा सकता है। वाहन को चुराने वाले भी सबसे पहले वाहन की नंबर प्लेट ही बदलते हैं जिससे पुलिस के लिये उनको पकड़ना मुश्किल हो जाता है। क्योंकि हर बार वाहन के चेसिस नंबर का मिलान नंबर प्लेट पर अंकित नंबरों से किया जाना संभव नहीं होता। वहीं वाहनो के फर्जी कागजात भी बनवा कर उन्हें बेचने का काम बेखौफ किया जाता है।

इन्हीं धोखाधड़ी से लोगों को बचाने के लिये दोपहिया, तीन पहिया और चार पहिया वाहनों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाये जाने की प्रक्रिया को शुरू किया गया था। मगर इस योजना का उपयुक्त प्रचार-प्रसार न किये जाने से लोग हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाने के फायदों से अंजान रहे और योजना को आशातीत सफलता नहीं मिली। ऐसे में अब हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट अनिवार्य करते हुए निश्चित समयाविधि के बाद इसके आभाव मंे चालान काटे जाने की चेतावनी भी दी जा रही है। वहीं आररटीओ से संबंधित कार्य भी कराये जाना संभव नहीं होगा।

बिना उपयुक्त संसाधन प्रदान किये और लोगों को जागरूक करने की बजाये उन्हें डराने-धमकाने के अंदाज मंें जारी किये यह आदेश आज इस योजना में भ्रष्टाचार के जन्मदाता बन गये हैं। सरकारी आदेश और लोगों की चिंता का फायदा उठा कर अधिकृत डीलर तय कीमतों से चार गुना अधिक रकम वाहन स्वामियों से वसूल रहे हैं। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने के लिये अधिकृत एजेंसियों द्वारा मनमाना दाम वसूला जा रहा है। 350 रुपये शुल्क वाले दोपहिया वाहन के लिये 1500 रूपये तक लिये जा रहे हैं। वहीं तीन व चार पहिया वाहनों के लिए 650 रुपये शुल्क निर्धारित है। लेकिन वाहन स्वामियों से डेढ़ से ढाई हजार रुपये तक लिये जा रहे हैं। वहीं आरटीओ के दबाव और चालान के डर से वाहन स्वामी इस अवैध वसूली को सहन कर रहे हैं। लेकिन बहुत से वाहन स्वामी वह भी हैं जो कोरोना संक्रमण के चलते पहले से ही आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। यह वाहन स्वामी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाने की हिम्मत तक नहीं कर पा रहे हैं।

ऐसा नहीं है कि आरटीओ के अधिकारियों को इस धांधली की शिकायत न की गयी हो या उन्हें भ्रष्टाचार के इस खेल की जानकारी न हो। लेकिन इस खेल को रोकने के लिये कोई प्रयास न किये जाने को देखते हुए लगता है कि भ्रष्टाचार के सागर में सभी डूबकी लगा रहे हैं। लेकिन चंद व्यक्तियों को पहुंच रहे अवैध वसूली के लाभ ने इस महत्वपूर्ण योजना की सफलता की संभावनाओं पर पानी फेर दिया है। जरूरी है कि आधार कार्ड, मतदाता परिचय पत्र या फास्ट टैग की तरह हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने के लिये भी अभियान चलाया जाये। वाहन स्वामियों को जागरूक करते हुए हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने के लाभ समझाये जायें और प्रक्रिया को सुलभ और भ्रष्टाचार मुक्त बनाया जाये। तभी यह योजना सफल होगी और सरकार को राजस्व और वाहन स्वामियों को सुरक्षा प्राप्त होगी।

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