नैनीताल। धामी सरकार ने हाईकोर्ट ने पूछा है कि चार धाम यात्रा में एसओपी कब से लागू की जाएगी। हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने सरकार से इस बारे में जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने पूछा है कि चारधाम यात्रा में घायल जानवरों को क्या व्यवस्था है। अनफिट जानवरों का क्या किया जाता है। चारधाम यात्रा के दौरान एसओपी को लागू करने के लिए अब तक क्या किया है। हाईकोर्ट ने यह भी जानकारी मांगी है कि लोगों केा घोड़े—खच्चरों से जाने के लिए एक दिन में कितने लोगों को अनुमति दी जाती है। हाईकोर्ट ने चारधाम यात्रा में फैली अव्यवस्थाओं और लगातार घोड़ों की मौतों के मामले में धामी सरकार को तीन हफ्ते के भीतर पूरा जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई अब 28 जुलाई को निर्धारित की गई है।
सुनवाई के दौरान सरकार ने हाईकोर्ट को अवगत कराया कि उन्होंने पशु चिकित्सकों के साथ अन्य सुविधाएं बढ़ाईं हैं। यात्रा मार्ग पर पानी की व्यवस्था करने के अलावा घायल घोड़ों की देखरेख चिकित्सक के माध्यम से की जाती है। हाईकोर्ट में इस संबंध में एसओपी शासन में लंबित है जिस पर निर्णय के बाद जारी की जाएगी। सरकार की ओर से हाईकोर्ट में यह भी बताया गया कि बदरीनाथ धाम के लिए 16 हजार, केदारनाथ धाम के लिए 13 हजार, गंगोत्री धाम के लिए आठ हजार और यमुनोत्री धाम के लिए पांच हजार प्रतिदिन श्रद्धालु भेजे जाने का प्रस्ताव था। सरकार की ओर से घोड़ा पड़ाव गौरीकुंड में पांच सौ जानवरों के लिए शेल्टर बनाया जा रहा है। इसके अलावा केदारनाथ लिनचोली में हजार-हजार लीटर के दो सोलर गीजर लगाए हैं। लेकिन सरकार की ओर से दाखिल किए गए इन जवाबों से हाईकोर्ट संतुष्ट नहीं हुई और सरकार को आदेश दिए हैं कि वो विस्तृत शपथपत्र पेश कर इस बारे में जल्द से जल्द जवाब दें।
