मेरठ/नई दिल्ली। देश में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले एक बार फिर से चिंता का कारण बन रहे हैं। पिछले एक माह से कोरोना संक्रमण के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। आज सोमवार को जहां देश में 11739 लोगों को संक्रमित पाए गए। वहीं पिछले 24 घंटे में एक बार फिर से केस 17 हजार के पार पहुंच गए हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि संक्रमण के बढ़ते मामलों के लिए ओमिक्रॉन के सब-वैरिएंट्स बीए—2 के साथ मुख्यरूप से बीए—4 और बीए—5 जिम्मेदार है।
बताया जा रहा है कि कोरोना के इन वैरिएंट्स के कारण गंभीर रोग और कोरोना संक्रमितों के अस्पताल में भर्ती की आशंका कम ही है। हालांकि चिकित्सकों का यह भी वैरिएंट्स काफी संक्रामक है और इससे उन लोगों के लिए खतरा जिनका वैक्सीनेशन भी हो चुका है।
कोरोना संक्रमण के चलते होने वाली मृत्युदर को लेकर शोध में जुटी वैज्ञानिक टीम ने बड़ा खुलासा किया। शोधकर्ताओं ने बताया कि कोरोना संक्रमण के पहले चरण के दौरान क्रोनिक किडनी डिजीज, शुगर, और ब्लडप्रेशन जैसी कोमारबिडीटी वाली युवा महिलाओं में मृत्यु का खतरा अधिक है।
यह भी कहा है कि जिन लोगों को पहले से कोमोरबिडिटी की समस्या है ऐसे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। यह संक्रमण की स्थिति में मृत्यु के खतरे को काफी हद तक बढ़ा रहा है। मेरठ के मेडिकल कालेज के चिकित्सक डा0अमित भटनागर के अनुसार संक्रमण के कारण मृत्यु के खतरे को जानने के लिए अध्ययन किया गया था। उन्होंने बताया कि एक रिपोर्ट के अनुसार इसके लिए गत 8 अप्रैल से 4 अक्टूबर, 2020 तक अस्पताल में भर्ती 2,586 कोरोना संक्रमितों का अध्ययन किया गया।
Read also: Covid: उत्तर कोरिया में कोरोना ने ढ़ाया कहर, लाखों लोगों के संक्रमण की चपेट में आने की आशंका
उन्होंने बताया कि जर्नल मॉलिक्यूलर एंड सेल्यूलर बायोकैमिस्ट्री में यह अध्ययन प्रकाशित हुआ है। जिसके अनुसार वैज्ञानिकों की टीम ने निष्कर्ष निकाला कि जो लोग पहले से क्रोनिक किडनी डिजीज की समस्या के शिकार हैं। अगर उन्हें कोरोना संक्रमण होता है तो यह गंभीर रोग और मृत्यु के जोखिम को काफी बढ़ा देता है।

