Monkeypox Virus: मंकीपॉक्स का जीवित वायरस तलाशने में जुटे भारतीय वैज्ञानिक

 
Monkeypox Virus

नई दिल्ली। देश में मंकीपॉक्स की दस्तक के बाद अब भारतीय वैज्ञानिकों की टीम वायरस को जीवित तलाशने में जुट गई है। केरल में मिले संक्रमित के सैंपल से जीवित वायरस को अलग करने के लिए पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) की टीम ने काम शुरू कर दिया है। वायरस अलग करने के बाद वैज्ञानिक आगे का अध्ययन शुरू करेंगे। इससे वैक्सीन, दवा और वायरस की प्रतिक्रिया के बारे में सटीक जानकारी हो सकेगी। कोरोना वायरस को ऐसे ही जीवित ढूंढा गया था। हालांकि उस समय इन्हें दो बार असफलता मिली थी। माना जा रहा है कि एक से दो सप्ताह में बड़ी उपलब्धि इस दिशा में देश को मिलेगी। 

एनआईवी के वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया है कि अभी तक हमारे पास 30 से अधिक सैंपल आए हैं। जिनमें से एक में संक्रमण मिला। अब जीवित वायरस को अलग किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। मंकीपॉक्स को लेकर वैश्विक स्तर पर जो जानकारियां हैं उस आधार पर इसके उपचार प्रबंधन को किया जा सकता है। एनआईवी के मुताबिक, कोरोना जैसे ही मंकीपॉक्स के बारे में अधिक साक्ष्य नहीं है। लेकिन जरूरी यह है कि कोई मंकीपॉक्स संक्रमित है और उसके उपयोग में आने वाले तौलिया,बर्तन,मोबाइल और बाथरूम इत्यादि के संपर्क में दूसरा कोई आता है तो वह संक्रमित होगा। 

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दिशा निर्देशों के अनुसार, बिना लक्षण वाले व्यक्ति को 21 दिन तक क्वारंटीन रहना होता है। आमतौर पर मंकीपॉक्स लक्षण छह से 13 दिन तक का होते है। कुछ मामलों में पांच से 21 दिन तक इसके लक्षण रह सकते हैं।
अगर कोई बीते 21 दिन के दौरान किसी देश से लौटा है जहां मंकीपॉक्स फैला हुआ है तो त्वचा पर रेशे,सिरदर्द, बुखार, सूजन,शरीर दर्द या फिर कमजोरी की शिकायत है तो उसे संदिग्ध माना जाएगा। ऐसा रोगी वह होगा। जिसमें बीमारी के लक्षण हैं लेकिन उनकी जांच नहीं हुई।