New Research: मोबाइल फोन, लैपटॉप और टैब से बढ़ रहा मोटापा, जैविक कार्यों पर नीली रोशनी डाल रही प्रभाव

 
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नई दिल्ली। मोबाइल फोन, लैपटॉप और टैब की स्क्रीन पर अत्यधिक समय देने से लोगों में मोटापा बढ़ा रहा है। इसके अलावा इन गैजेटस की स्क्रीन मनोवैज्ञानिक के अलावा जैविक कार्य पर भी प्रभाव डाल रही है। इन उपकरणों से निकलने वाली नीली रोशनी मनुष्य के बुनियादी जैविक कार्यों को बुरी तरह से प्रभावित कर रही है।  यह निष्कर्ष मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में सामने आए। हालांकि यह अध्ययन मक्खियों पर किया  है। लेकिन इसके चौंकाने वाले परिणाम आए हैं कि इंसानों पर इसी तरह का प्रभाव दिखाई दे सकता है। अध्ययन के मुताबिक टीवी, लैपटॉप और मोबाइल फोन जैसे रोजमर्रा के उपकरणों की स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी के संपर्क में अधिक रहने से त्वचा और न्यूरॉन्स पर इसका असर पड़ सकता है। इसी के साथ कोशिकाओं पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है।

नीली रोशनी के संपर्क में आने से बचना एक अच्छी एंटीएजिंग रणनीति होती है। शोधकर्ताओं ने संभावना जताई है कि नीली रोशनी में आने वाली मक्खियों की तुलना में अंधेरे में रहने वाली ज्यादा समय तक जीवित रहती हैं। शोध में बताया कि शायद यह पहली बार सामने आया है कि विशिष्ट मेटाबोलाइट्स कोशिकाओं के सही ढंग से कार्य करने के लिए जरूरी हैं लेकिन नीली रोशनी के संपर्क में आने से ये प्रभावित होते हैं। शोध में समझाया गया कि दो सप्ताह तक नीली रोशनी के संपर्क में आने वाली मक्खियों के मेटाबोलाइट्स के स्तर की तुलना पूर्ण अंधेरे में रखी मक्खियों से जब की गई तो पता चला कि इस एक्सपोजर ने मक्खियों की कोशिकाओं में मेटाबोलाइट्स के स्तर में बहुत बड़ा अंतर पैदा किया।

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मेटाबोलाइट सक्सेनेट के स्तर में वृद्धि काफी हुई लेकिन ग्लूटामेट का स्तर भी कम हुआ था। ग्लूटामेट जैसे न्यूरॉन्स के बीच संचार के लिए जिम्मेदार अणु नीली रोशनी में कमजोर होते हैं। जिससे कोशिकाएं कम काम करने लगती हैं। जिससे कम आयु में जान का जोखिम बनता है। दरअसल एलईडी डिस्प्ले स्क्रीनों से युक्त मोबाइल फोन, डेस्कटॉप और टीवी से हम सब नीली रोशनी के संपर्क में आते हैं। चूंकि मक्खियों और मनुष्यों की कोशिकाओं में संकेत देने वाले रसायन एक समान ही होते हैं। इसलिए मनुष्यों पर नीली रोशनी के नकारात्मक प्रभावों की संभावना अब अधिक जताई जा रही है। दुनिया में लोगों में तेजी से बढ़ रहा मोटापा भी इसी का ही कारण माना जा रहा है।