कोरोना वैक्सीन खरीदने की होड़, भारत ने बुक कीं 50 करोड़ से अधिक डोज

 
कोरोना वैक्सीन खरीदने की होड़, भारत ने बुक कीं 50 करोड़ से अधिक डोज कोरोना वैक्सीन खरीदने की होड़, भारत ने बुक कीं 50 करोड़ से अधिक डोज

नई दिल्ली: कोरोना महामारी ने दुनिया में तबाही मचा रखी है. सारे उपायों के बाद अब लोगों को निगाहें कोरोना वैक्सीन पर टिकी हैं जिसको बनाने के लिए दुनिया की कई जानी मानी दवा कम्पनियाँ दिन रात लगी हुई हैं. भारत में अबतक 90 लाख मरीज कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं. इस बीच एक अच्छी खबर यह आ रही है कि भारत ने 150 करोड़ से अधिक डोज खरीदने के लिए एडवांस बुकिंग कर ली है. वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड-19 वैक्सीन डोज खरीद प्रतिबद्धता के मामले में भारत तीसरे नंबर पर है. यह रिपोर्ट ड्यूक यूनिवर्सिटी के एक शोध पर आधारित है, जिसे लांच एंड स्केल स्पीडोमीटर इनिशिएटिव नाम दिया गया है.

कोरोना वैक्सीन डील में भारत तीसरे नंबर पर
वाल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक सबसे ज्यादा वैक्सीन खरीद की डील पक्की करने वाले देशों में भारत तीसरे नंबर पर है तो अमेरिका पहले नंबर पर और यूरोपियन यूनियन दूसरे नंबर पर है. बता दें कि कोरोना वायरस के खात्मे के लिए दुनियाभर की 150 से ज्यादा कंपनियां कोरोना वैक्सीन बना रही हैं. इनमें से करीब एक दर्जन कंपनियों की वैक्सीन अब ट्रॉयल के फाइनल स्टेज पर हैं. फाइजर और सनोफी जैसी कंपनियों का दावा है कि उनकी वैक्सीन कोरोना के इलाज में 90 फीसदी और 94.5 फीसदी तक कारगर साबित हुई हैं.

खरीदारी को लेकर मची है होड़
कई कंपनियों ने ट्रायल में अच्छे परिणाम को देखते हुए बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू कर दिया है. ऐसे में बड़े देशों के बीच इनकी खरीद और डील को लेकर होड़ मच गई है. इसी क्रम में भारत ने भी 150 करोड़ से अधिक वैक्सीन खरीद के लिए डील कर ली है. ड्यूक यूनिवर्सिटी के इस शोध में कोरोना वैक्सीन खरीद करने वाले देशों की एक लिस्ट तैयार की गई. इसके मुताबिक एडवांस में वैक्सीन खरीद की डील पक्की करने वाले देशों की फेहरिस्त में यूनाइटेड स्टेट्स और यूरोपियन यूनियन के बाद भारत तीसरे नंबर पर है.

अब तक हो चुकी है 800 करोड़ वैक्सीन की बुकिंग
ड्यूक यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के मुबाबिक, अब तक 800 करोड़ वैक्सीन डोज की बुकिंग हो चुकी है, जबकि टीकों के प्रभाव का नतीजा सामना नहीं आया है. विशेषज्ञ इस बात को लेकर भी चिंता जता रहे हैं कि अमीर और मिडिल इनकम वाले देशों की ओर से एडवांस डील्स की वजह से कोरोना वायरस टीके के वैश्विक रूप से समान वितरण में चुनौती आ रही है.