Sunday, November 28, 2021
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कॉकटेल का डोज़ बनेगा कोरोना का काल

  • पश्चिमी उत्तरप्रदेश में पहली बार मेरठ जिले में मोनोक्लोनल एंटीबाडी थेरेपी का प्रयोग
  • बच्चों को बचाने में भी साबित होगी मजबूत हथियार

अमित बिश्‍नोई

मेरठ। मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थेरेपी की अब मेरठ में भी शुरुआत हो चुकी है हालाकी वेस्ट यूपी में मेरठ पहला ऐसा जिला बन गया है जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की यह थैरेपी पहली बार किसी मरीज को दी गई है इस थैरेपी को देने के बाद जहां मरीज की हालत में काफी सुधार है वही आने वाले वक्त के लिए डॉक्टर इसे कोरोना संक्रमण के इलाज में काफी कारगर और अहम मान रहे हैं डॉक्टर्स का कहना है कि यह थेरेपी ना केवल इलाज बल्कि संक्रमण को काबू करने के लिहाज से भी काफी मददगार साबित हो सकती है।

ऐसे हुई तैयार
स्टडीज के अनुसार अमेरिका में करीब एक हजार लोगों कॉकटेल एंटीबॉडी थेरेपी का प्रयोग हुआ था इसके सक्सेसफुल रेट के बाद ही से आगे मंजूरी दी गई अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कोरोना संक्रमित होने के बाद उन्हें भी यही थेरेपी दी गई थी स्टडीज बताती है कि इस वैक्सीन को बनाने में दो अलग-अलग इंजेक्शन मिलाए गए हैं इसमें कासिरिविम्माब और इमदेविमाब की 600 -600 एमजी की डोज़ शामिल की गई है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि मोनोक्लोनल एंटीबॉडी मरीज को तत्काल सुरक्षा प्रदान करती है कोरोनावायरस होने के 72 घंटे के अंदर इसे मरीज को देना जरूरी होता है तभी इसका प्रभाव देखा जा सकता है।

बच्चों के लिए साबित हो सकती है मददगार
कोरोनावायरस की तीसरी लहर को देखते हुए डॉक्टर इसे और भी जरूरी बन रहे हैं डॉक्टर्स का कहना है कि बूढ़े बच्चे और कमजोरी मिलिट्री वाले लोगों पर यह थेरेपी काफी कारगर साबित हो सकती है खासतौर से हाई रिस्क मरीजों के लिए इसकी काफी अहमियत है डॉक्टर का कहना है कि 12 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को यह थैरेपी दी जा सकती है जिससे रोना वायरस के संक्रमण को रोका जा सकता है डॉक्टर्स मानते हैं कि यह थैरेपी काफी पुख्ता थेरेपी के तौर पर सामने आई है यह वायरस को बेअसर करने की तकनीक पर काम करती है। नयूटिमा अस्पताल के डायरेक्टर डॉ अमित बताते हैं कि ये बॉडी में जाकर कोशिकाओं में वायरस को मल्टीपल होने से रोकती है और उसका फैलाव नहीं हो पाता। कोशिकाएं संक्रमित होने से बच जाती है। डॉक्टर का कहना है कि अगर यह थैरेपी कारगर साबित हुई तो किसी वरदान से कम नहीं है।

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