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हरियाणा विधानसभा चुनाव: दलबदलुओं को टिकट से भाजपा में मची भगदड़

saini

भाजपा में दलबदलुओं के स्वागत के बढ़ते चलन से पार्टी के अंदर असंतोष लगातार बढ़ रहा है, अब तो हर चुनाव में बगावती सुरों का उभरना कोई नई बात नहीं रह गयी है। अभी जम्मू कश्मीर में पार्टी को अपनी उम्मीदवारों की सूची को वापस लेना पड़ा था क्योंकि उसमें भी दलबदलुओं को प्राथमिकता दी गयी थी जिससे स्थानीय नेतृत्व में नाराजगी पैदा हो गयी थी, अब यही हालत हरियाणा में हो गयी है. भाजपा ने कल 90 सीटों वाली विधानसभा के लिए 67 उम्मीदवारों की सूची जारी की जिसमें कई प्रमुख नाम नदारद है और बाहरी लोगों को एडजस्ट किया गया है. अब इस लिस्ट के सामने आते ही पार्टी में भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गयी है.

पहली सूची जारी होने के बाद से ही रानिया, महम, थानेसर, उकलाना, पृथला, रेवाड़ी, रतिया, बाढड़ा में बगावत देखने को मिली। रानिया से निवर्तमान विधायक रणजीत चौटाला ने समर्थकों के साथ बैठक की। उन्होंने टिकट कटने की स्थिति में बगावत के संकेत पहले ही दे दिए थे। टिकट कटने के बाद रतिया से भाजपा विधायक लक्ष्मण नापा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। वह कांग्रेस पार्टी में शामिल होंगे। उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर इसकी पुष्टि की है। रोहतक जिले की महम सीट से भाजपा के 2019 प्रत्याशी शमशेर सिंह खरखड़ा, चरखी दादरी जिले से भाजपा किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष विकास उर्फ ​​भल्ले ने भी इस्तीफा दे दिया है। इसके अलावा सोनीपत जिले के उपाध्यक्ष संजीव वलेचा ने पार्टी को अलविदा कह दिया है।

हिसार की उकलाना सीट से जेजेपी के पूर्व विधायक अनूप धानक को टिकट मिलने के बाद नाराज शमशेर गिल और पूर्व प्रत्याशी सीमा गैबीपुर ने भी पार्टी को अलविदा कह दिया। कमल गुप्ता को हिसार से टिकट मिलने के बाद भाजपा जिला उपाध्यक्ष तरुण जैन ने पार्टी को अलविदा कहने का मन बना लिया है। उन्होंने पहले ही इसकी घोषणा कर दी थी। सोनीपत में भाजपा पूर्वांचल प्रकोष्ठ के सह संयोजक संजय ठेकेदार ने भी भाजपा छोड़ने का ऐलान कर दिया है। कविता जैन भी सोनीपत से बगावत कर सकती हैं। वह निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं। कविता जैन पूर्व सीएम मनोहरलाल खट्टर के ओएसडी रहे राजीव जैन की पत्नी हैं।

भाजपा की सूची जारी होते ही पार्टी के पुराने नेता नाराज बताए जा रहे हैं। इसमें कई पूर्व मंत्री और विधायक शामिल हैं। इसके अलावा पार्टी ने 11 दलबदलुओं को भी मौका दिया है। ऐसे में अगर पार्टी बागी नेताओं को चुनाव मैदान में उतरने से नहीं रोकती है तो हैट्रिक लगाने की कोशिश कर रही पार्टी को बड़ा झटका लग सकता है।

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