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बीजेपी ने हमारी सुनी होती तो ना जाती किसानों की जान


बीजेपी ने हमारी सुनी होती तो ना जाती किसानों की जान

चंडीगढ़। कृषि कानूनों को लेकर यदि भारतीय जनता पार्टी ने हमारी बात सुनी होती तो उन्हें इतना कुछ झेलने की जरूरत नहीं पड़ती और ना ही किसानों को इस तरह से जान गंवानी पढ़ती। यह कहना है शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल का जो भाजपा के साथ न जाने का ऐलान कर चुके हैं।

गौरतलब है कि तीनों कृषि कानूनों के विरोध में शिरोमणि अकाली दल ने सत्तारूढ़ भाजपा का साथ छोड़ दिया थां लेकिन अब कानूनों के वापस लिये जाने के बाद यह संभावना जताई जा रही थी की शिरोमणि अकाली दल भाजपा के साथ मिलकर आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ सकता है। लेकिन सुखबीर बादल ने भाजपा के साथ गठबंधन की संभावनाओं से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना है कि कृषि कानूनों को कैबिनेट में लाए जाने पर उन्होंने इसके दुष्परिणामों की चेतावनी दी थी। लेकिन मोदी सरकार ने अपना रास्ता खुद आगे बढ़ाने की सोची। नतीजा यह निकला कि हमारे बिना कुछ किए ही हमें भी संकट का सामना करना पड़ा। उन्होंने इन सब के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

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सुखबीर बादल ने पीएम मोदी के माफी मांगने को लेकर कहा कि किसी चीज को नष्ट करने के बाद माफी मांगने से छवि तुरंत नहीं बदलती और ना ही से कोई फर्क पड़ता है। उन्होंने कैप्टन अमरिंदर सिंह पर भी आरोप लगाते हुए कहा कि मनप्रीत सिंह बादल कृषि कानून को लेकर आयोजित बैठक में शामिल हुए थे लेकिन उन्होंने कभी इसका विरोध नहीं किया। कांग्रेस को सबसे बड़ा अपराधी बताते हुए सुखबीर बादल ने कहा कि उन्होंने इन कानूनों पर हस्ताक्षर किए हैं इसलिए वह सबसे बड़ी अपराधी है।

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हमारा इन कानूनों से कोई लेना-देना नहीं था और सिर्फ कैबिनेट में शामिज होना ही हमारी गलती थी। सुखबीर बादल ने कहा कि किसान आंदोलन के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में सिर्फ भाजपा ही किसानों के निशाने पर थी। लेकिन राज्य भर का दौरा करने के बाद मुझे अच्छा समर्थन मिला और ना ही मुझे रैलियां करने से रोका गया। दलित नेता चरणजीत चन्नी को मुख्यमंत्री बनाए जाने के सवाल पर सुखबीर बादल ने कहा कि सक्षम व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाना चाहिए चाहे वह किसी भी जाति या धर्म का हो।

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