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हाथ से गायब न हो जाए एक और लकीर


हाथ से गायब न हो जाए एक और लकीर

खालिद इकबाल

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के बाद अब राजस्थान में कांग्रेस की सरकार संकट में है। जिसके चलते प्रदेश में एक बार फिर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं।बताया जा रहा है कि सत्ताधारी कांग्रेस के 24 विधायक मानेसर के एक होटल में रुके हैं। वहीं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रतिद्वंद्वी बीजेपी पर सरकार गिराने की कोशिश का आरोप लगाया है। जबकि बीजेपी इसे कांग्रेस का अंदरूनी कलह बता रही है।

दरअसल, राजस्थान में प्रदेश नेतृत्व से नाराज विधायक शनिवार देर शाम दिल्ली पहुंचे हैं और यह विधायक सोमवार को कांग्रेस हाईकमान से मुलाकात कर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक करीब 2 दर्जन विधायक दिल्ली पहुंच चुके हैं और आज कुछ और विधायकों दिल्ली पहुंचने वाले हैं। सूत्रों के मुताबिक पार्टी के विधायक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात कर सकते हैं।

गहलोत का भी हो सकता कमलनाथ वाला हाल

राजस्थान का नया सियासी ड्रामा चार माह पूर्व मध्य प्रदेश के कमलनाथ सरकार गिरने जैसा है। सब कुछ करीब-करीब वैसा ही जैसा 4 महीने पहले तब कांग्रेस शासित मध्य प्रदेश में हुआ था। अंदरूनी कहल की वजह से वहां पर कांग्रेस की कमलनाथ सरकार गिर गई थी,ऐसे में राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत की धड़कनों का बढ़ना स्वाभाविक है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ताजा मामले का संबंध सिंधिया-पायलट कनेक्शन से जुड़ा भी हो सकता है।

क्या हुआ था 4 महीने पहले

मध्य प्रदेश में 4 महीने पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस के 22 विधायकों का इस्तीफा कराकर कमलनाथ सरकार को गिरा दिया था। विधायकों को पहले गुरुग्राम और बाद में बेंगलुरू के होटल में ठहराया गया था। कमलनाथ के सामने तब युवा ज्योतिरादित्य सिंधिया थे तो अब गहलोत के सामने युवा डेप्युटी सीएम सचिन पायलट हैं। पायलट 3 दिनों से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। दूसरी तरफ राजस्थान कांग्रेस के 24 विधायक शनिवार रात से ही गुरुग्राम के ही मानेसर में एक बड़े होटल में रुके हुए हैं। इनमें से कई विधायकों के मोबाइल फोन स्विच ऑफ हैं।

राजस्थान में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और कांग्रेस की गहलोत सरकार पर संकट गहराता जा रहा है।राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच के तनातनी अब खुल कर सामने आ गई है।सचिन पायलट का आरोप है कि उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है और सरकार के फैसलों में अहमियत नहीं दी जाती है।उधर गहलोत खेमे के लोगों का आरोप है कि सचिन पायलट बीजेपी के संपर्क में हैं। हालांकि सियासत में कुछ भी कहना मुश्किल है,लेकिन अफवाहों के इस दौर में फिलहाल देश भर के सियासी लोगो की नजरें सचिन पायलट के फैसले और कांग्रेस के भविष्य पर टिकी है।

राजस्थान में सियासी समीकरण

राजस्थान विधानसभा के कुल विधायकों की संख्या 200 है। इनमें से कांग्रेस के पास 107 विधायक हैं। इसके अलावा उन्हें 13 इंडिपेंडेट विधायकों का समर्थन भी हासिल है। आरएलडी के एक विधायक सुभाष गर्ग भी सरकार के साथ हैं और गहलोत कैबिनेट में मंत्री हैं। इस तरह गहलोत सरकार को 121 विधायकों का समर्थन हासिल है। दूसरी तरफ बीजेपी के 72 विधायक हैं। जबकि सत्ताधारी पार्टी के 24 नाराज विधायक गुरुग्राम स्थित मानेसर के एक होटल में ठहरे हैं। अब यही विधायक गहलोत सरकार के लिए मुसीबत बन गए हैं।

आरोप-प्रत्यारोप शुरू

ताजा सियासी संकट को लेकर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि बीजेपी विधायकों की खरीदफरोख्त कर कांग्रेस की सरकार गिराने की कोशिश में है। गहलोत का दावा है कि विधायकों को 25-25 करोड़ रुपए का लालच दिया जा रहा है। इसके उलट बीजेपी इसे कांग्रेस की आपसी खींचतान बता रही है।

एसीबी की ओर से दर्ज FIR से भी है कनेक्शन

बता दें कि शनिवार को राजस्थान एसओजी/एसीबी की ओर से दर्ज एफआईआर में 5 विधायकों के नाम सामने आए हैं। इनमें से 2 कांग्रेस के थे और तीन वे निर्दलीय विधायक थे, जिन्होंने कांग्रेस सरकार को समर्थन दे रखा था। जानकारी के मुताबिक इस प्रकरण के बाद नाराज विधायकों के खेमे ने कांग्रेस नेतृत्व को इसकी शिकायत करने की रणनीति बनाई है। इसमें ज्यादातर विधायक पूर्वी राजस्थान से है।

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