ज्ञानव्यापी मस्जिद मामले में रिपोर्ट भले ही बंद लिफ़ाफ़े में सौंप दी गयी हो मगर उस रिपोर्ट से जुडी हुई बहुत सी जानकारियां इस वक्त टीवी चैनलों पर चल रही हैं, बताया जा रहा कि जो रिपोर्ट आज अदालत में पेश की गयी उसकी एक एक कॉपी दोनों पक्षों को सौंपी गयी हैं और शायद वहीँ से ये जानकारियां मीडिया में आयी हैं.
मीडिया में जो रिपोर्ट चल रही है उनके मुताबिक ऐसी बहुत सी निशानियां मिली हैं जो हिन्दू धर्म से जुडी हुई आकृतियां नज़र आती हैं हालाँकि बिजनेसबाइट्स इस तरह की जानकारियों की पुष्टि नहीं करती। पहले जानकारी मिली थी कि कोर्ट कमिश्नर विशाल सिंह ने 72 पन्नों की रिपोर्ट फाइल की थी, अब बताया जा रहा है कि 8 पेज की रिपोर्ट है जिसका पेज नंबर सात मीडिया में गर्दिश कर रहा है जो सोशल मीडिया पर भी वायरल है।
इस रिपोर्ट में बताया गया कि कैसे वुजूख़ाने के तालाब का पानी कम किया गया और कैसे एक सीढ़ी लिटाकर एक व्यक्ति को तालाब के बीच में भेजा गया जहाँ उसे काले रंग का गोलनुमा पत्थर मिला जो ऊपर से कटा हुआ था और उसमें एक बारीक छेद भी जो लगभग 63 इंच गहरा था. इसी गोलनुमा पत्थर को हिन्दू पक्ष शिवलिंग बता रहा है और मुस्लिम पक्ष बेकार पड़ा फव्वारा।
रिपोर्ट में यह भी है कि इस ख़राब फव्वारे के बारे में जब मुस्लिम पक्ष से सवाल किये गए तो उनके जवाब विरोधभासी दिखे. रिपोर्ट के मुताबिक मस्जिद के मुख्य गुम्बद के नीचे एक खम्बे पर स्वस्तिक जैसा निशाँ नज़र आया, वहीँ मस्जिद के गेट के पास तीन डमरू बने हुए दिखे। रिपोर्ट के अनुसार तहखाने के एक कमरे में पड़े मलबे में पड़े हुए पत्थरों में मंदिरों में बनी आकृतिया दिखीं। इसके अलावा मस्जिद परिसर में त्रिशूल, घंटियां और हाथी के सूंढ़ बनी हुई आकृतियों का भी ज़िक्र है. टहकहने में बने हुए चार पुराने खम्भों पर भी हिन्दू धर्म के चिन्ह बने हुए हैं.
इससे पहले हटाए गए कमीशनर अजय मिश्रा की रिपोर्ट भी मीडिया में चल रही थी और उसमें भी कुछ इस तरह के दावे थे. बहरहाल कमीशन के दौरान कमिश्नरों को वहां क्या क्या नज़र आया इसकी आधिकारिक जानकारी जल्द सामने आ जाएगी मगर यह जो अनाधिकारिक जानकारियां मीडिया में चल रही हैं यह कमीशन पर बहुत बड़ा सवाल उठा रही हैं. एकबार फिर बिजनेसबाइट्स इन जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है.
