Site icon Buziness Bytes Hindi

ज्ञानवापी मामला: अदालत में फिर न पेश हो सकी सर्वे रिपोर्ट

Gyanvapi case: Survey report could not be presented in court again

ज्ञानवापी परिसर में किए गए सर्वे की रिपोर्ट आज भी जिला जज की अदालत में पेश न हो सकी. एएसआई ने रिपोर्ट दाखिल करने के लिए फिर से एक हफ्ते का समय मांगा है. ऐसा छठी बार हुआ जब आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया ने रिपोर्ट जमा कराने को लेकर अदालत से मोहलत मांगी है. बता दें कि जिला जज डॉक्टर अजय कृष्ण विश्वेश ने 11 दिसंबर को सर्वे रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया गया था. ASI अब यह रिपोर्ट 18 दिसंबर को पेश करेगी।

तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने ज्ञानवापी परिसर में वैज्ञानिक विधि से यह पूरा सर्वे किया है. ज्ञानवापी परिसर की अंदरूनी और बाहरी दीवारों विशेषकर पश्चिमी दीवार, शीर्ष मीनार और नीचे के तहखानों में परंपरागत तरीके से जीपीआर, जीपीएस समेत अन्य अत्याधुनिक विभिन्न मशीनों के जरिए जांच सर्वे कर सबूत जुटाए गए हैं. इसी साल 4 अगस्त से 2 नवंबर तक हुए सर्वे के दौरान ASI की टीम ने जांच को पूरा कर लिया है. इस पूरी जांच के दौरान सर्वे टीम की अगुवाई अपर महानिदेशक ASI आलोक त्रिपाठी ने की. कथित तौर पर शिवलिंग मिलने वाले स्थान जहाँ पर वुजूख़ाना है उस क्षेत्र को अदालत के आदेश के बाद जांच परिधि से बाहर रखा गया था.उस सील एरिया को छोड़कर पूरे ज्ञानवापी परिसर की वैज्ञानिक विधि से जांच का प्रार्थना पत्र मंदिर पक्ष की ओर से 6 मई को जिला जज की कोर्ट में दाखिल कराया गया था. प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए जिला जज ने 21 जुलाई को ज्ञानवापी परिसर सुप्रीम कोर्ट के द्वारा सील क्षेत्र को छोड़कर उसे पूरे एरिया का सर्वे करने का आदेश दिया था.

इसके फैसले के खिलाफ अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने 24 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान 26 जुलाई तक सर्वे पर रोक लगाते हुए उसे उसे हाई कोर्ट जाने का आदेश दिया था. वहीँ हाईकोर्ट ने 25 जुलाई को मामलों की सुनवाई के लिए 3 अगस्त तक सर्वे पर रोक लगा दी, इसके बाद हाई कोर्ट ने 3 अगस्त को ज्ञानवापी परिसर में सर्वे की अनुमति दे दी थी.

Exit mobile version