Gujarat chunavi dangal:– गुजरात मे होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी में लगी पार्टियों के कुछ दिग्गज नेता ऐसे हैं जिन्होंने अपने बलबूते और अपनी काबिलियत के दम पर राजनीति में अपनी धमक बनाई है। ऐसे ही एक नेता हैं जिग्नेस मेवानी जिन्होंने अपने बलबूते पर गुजरात के।दलित वोट बैंक पर अपना आध्यात्मिक स्थापित कर रखा है और दलितों के बीच इनकी उम्दा छवि बनी हुई है। वैसे तो यह किसी राजनीतिक परिवार से सम्बंधित नहीं थे इनके पिता जी नगत निगम कर्मचारी थे लेकिन इनकी रूचि समाचारों और राजनीतिक के नुक्कड़ चर्चो से राजनीति की ओर हो गई।
इन्होंने काफी संघर्ष के साथ अपनी पढ़ाई पूरी की अंग्रेजी से स्नातक कर पत्रकारिता का डिप्लोमा प्राप्त किया और गुजरात की एक पत्रिका में बतौर पत्रकार कार्य किया। लेकिन यह दलितों के मसीहा तब बन गए जब गुजरात के ऊना गाँव मे दलितों पर हमला हुआ और इन्होंने दलित के हित मे खड़े होकर आंदोलन किया। इस आंदोलन ने जिग्नेस मेवानी को दलितों का मसीहा बना दिया और दलित इनके समर्थन में खड़ा हो गया।
जाने जिग्नेस मेवानी के दलित आंदोलन ने कैसे बनाया उन्हें राजनीतिज्ञ :-
जिग्नेस मेवानी जिन्होंने दलितों के समर्थन में ऊना गांव में हुए दलित पर हमले के बाद आंदोलन शुरू किया और गुजरात भर में दलित एकता के साथ विद्रोह आरंभ किया। इतना ही नहीं इन्होंने इस दौरान अहमदाबाद से पुणे तक के लिए दलित असस्मित यात्रा निकाली और यह हर समाचार एजेंसी की प्रमुख हेडलाइन बन गए। जिग्नेस मेवानी के इस आंदोलन में दो हजार से ज्यादा दलित नेताओं ने भाग लिया और आंदोलन के खत्म होने तक यह गुजरात मे एक बड़े दलित नेता बन गए। दलित नेता बनने के बनने के बाद इन्होंने 2017 गुजरात विधानसभा चुनाव में बड़गांव से अनुसूचित जाति की सीट पर निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत दर्ज कर विरोधियों को हक्का बक्का कर दिया।
वही अब खबर आ रही है कि यह गुजरात कांग्रेस का हिस्सा बन सकते हैं। अगर यह कांग्रेस का हाँथ थाम लेते हैं तो इससे गुजरात मे कांग्रेस की डामडोल स्थिति काफी हद तक सुधर जाएगी और उनको इस स्थिति का फायदा दलित वोट बैंक से होगा।
