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Farmer leader Rakesh Tikait: रुड़की में गरजे राकेश टिकैत,‘किसानों के गन्ने का भुगतान करें सरकार’, स्थानीय किसानों से टकराव

रुड़की। रुड़की के इकबालपुर शुगर मिल पर बकाया गन्ने की भुगतान की मांग को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसानों द्वारा धरना दिया जा रहा है। धरनास्थल पर पहुंचे भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि हरियाणा और किसानों का करोड़ों रुपये का भुगतान बकाया है। किसान धरने पर बैठे हैं और अब अपना बकाया भुगतान लेकर ही जाएंगे। इसके लिए किसानों को चाहे जेल भी जाना पड़ा लेकिन इसके लिए पीछे नहीं हटेंगे। आज सोमवार को धरना स्थल पर पहुंचे भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि अब बकाया भुगतान में देरी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगी। किसान आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। गन्ना मिलें किसानों को समय पर भुगतान नहीं कर रही। हरियाणा के किसानों का करोड़ों रुपये का भुगतान मिल पर बकाया है। किसान धरने पर बैठे हैं और अपना भुगतान लेकर ही अब धरना स्थल से हटेंगे। उन्होंने कहा कि भाकियू किसानों की अनदेखी बर्दाश्त नही करेगी। इसके लिए किसानों को जेल में जाना पड़ेगा तो वो पीछे नहीं हटेंगे। किसानों का पूरा भुगतान नहीं होने तक ये आंदोलन जारी रहेगा। 

वहीं स्थानीय विधायक विरेंद्र जाती ने कहा कि गन्ना भुगतान नहीं होने पर वो सड़क से विधानसभा तक संघर्ष करेंगे। किसानों का गन्ने का भुगतान हर हाल में कराया जाएगा। इस दौरान शुगर मिल प्रबंधन ने बकाया भुगतान जारी करने का समय बताया लेकिन किसान नहीं माने और पूरा भुगतान होने तक धरना जारी रखने का एेलान किया है। इस दौरान गढ़वाल मंडल अध्यक्ष संजय चौधरी, जिला अध्यक्ष विजय शास्त्री के अलावा अन्य किसान नेता मौजूद रहे। इकबालपुर शुगर मिल मुख्य प्रबंधक सुरेश शर्मा ने धरनास्थल पर पहुंचकर भुगतान देने की स्थिति के बारे में किसानों को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि  हरियाणा किसानों के 33 करोड़ के लगभग बकाया भुगतान है। इसमें पहले 11 करोड़ का भुगतान हो चुका है। आधा भुगतान मिल का पेराई सत्र चालू होने पर कर दिया जाएगा। बाकी का अन्य स्रोतों से किया जाएगा। लेकिन धरनारत किसान इससे संतुष्ट नहीं हुए। किसानों ने तत्काल भुगतान की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने का एेलान कर दिया। इस दौरान मिल जीएम फाइनेंस परमवीर सिंह, जीएम एडमिन बीएन चौधरी और जीएम केन शिव कुमार सिसौदिया किसानों के बीच आए और उनको समझाने की कोशिश की। लेकिन किसान मानने को तैयार नहीं थे।

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 किसानों के धरने में हरियाणा और स्थानीय किसान एकत्र हुए। इस दौरान काफी देर तक हरियाणा के किसानों के भुगतान की बात होती रही। इस पर स्थानीय किसानों द्वारा उनके भुगतान का मुद्दा उठाए जाने की भी बात कही। पहले स्थानीय किसानों और फिर हरियाणा के किसानों को भुगतान दिए जाने की बात को लेकर धरनास्थल पर ही हंगामा शुरू हो गया। स्थानीय किसान आजाद और धर्मपाल प्रधान ने राकेश टिकैत को भी निशाने पर लिया। इस पर टिकैत समर्थक और स्थानीय किसानों के बीच टकराव की स्थिति बन गई। मामला बढ़ते देख पुलिस ने हस्तक्षेप कर बीच बचाव कराया। किसान नेताओं ने मंच से धरने को लगातार चलाए रखने की घोषणा की। वहीं स्थानीय किसानों ने अपने को अब धरने से अलग करने की घोषणा की है।

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