नई दिल्ली। घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के अलावा हवाई ईंधन की कीमतों में कमी लाने की तैयारी के लिए आज सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। इनके उत्पादों के निर्यात पर अब कंपनियों को अधिक टैक्स चुकाना पड़ेगा। यह कदम रिफाइन किए पेट्रोल-डीजल के निर्यात को घटाने के लिए किया गया है। सरकार ने अपनी तरफ से जारी किए गए नोटिफिकेशन में कहा है कि अब आज यानी एक जुलाई से पेट्रोल और डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल का निर्यात करने पर अधिक टैक्स देना होगा। सरकार ने पेट्रोल और एविएशन टरबाइन फ्यूट के निर्यात पर अब छह रुपये प्रति लीटर का निर्यात टैक्स लगा दिया है। जबकि डीजल निर्यात करने पर 13 रुपये प्रति लीटर टैक्स कंपनियों को देना होगा।
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देश में होने वाले क्रूड ऑयल का अगर अब बाहर निर्यात किया गया तो कंपनियों को प्रति टन 23,230 रुपये का अलग से टैक्स सरकार को देना होगा। सरकार की ओर से ये कदम ग्लोबल बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए उठाया है। जिससे कि घरेलू उत्पादन को बाहर जाने से रोका जा सके।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक एक्सपोर्ट पर फोकस करने वाली रिफाइनरीज को नए टैक्स से छूट मिलेगी। लेकिन उन्हें अपने उत्पादन का तीस प्रतिशत डीजल पहले घरेलू बाजार में देना होगा। इसके अलावा छोटे उत्पादक है और पिछले वित्तवर्ष में कुल उत्पादन 20 लाख बैरल से कम रहा। ऐसे उत्पादकों को नए नियमों से छूट प्रदान की जाएगी। निजी क्षेत्र की रिफाइनरियां अपने उत्पादों का अधिकांश हिस्सा निर्यात कर देतीं हैं। जिस कारण इस फैसले का सबसे ज्यादा असर इन्हीं पर होगा। पिछले कुछ समय से डीजल का निर्यात अचानक काफी बढ़ा है। जिस पर लगाम लगाना जरूरी है। मैंगलोर और चेन्नई की रिफाइनरी में घरेलू आपूर्ति में आठ प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा ओएनजीसी और वेदांता भी 5 प्रतिशत गिरावट दिखा रही हैंं इससे घरेलू बाजार में ईंधन की सप्लाई पर काफी बुरा असर पड़ा है।
