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नेपाल में सरकार और समर्थन दल आमने—सामने,अल्पमत में देउबा

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काठमांडू। जनता समाजवादी पार्टी से जुड़े नेताओं को देउबा सरकार से बर्खास्त किए जाने के साथ इस पार्टी का नेपाल की सत्ताधारी गठबंधन से अब अलगाव हो गया है। पार्टी ने अगले आम चुनाव के लिए विपक्षी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) से सीटों का गठबंधन किया है। कई दिनों तक चली ऊहापोह के बाद ही प्रधानमंत्री देउबा ने पार्टी से जुड़े मंत्रियों को हटाने का निर्णय लिया था। विपक्षी पार्टी से तालमेल करने के बावजूद जनता समाजवादी पार्टी के नेता जोर इस बात पर जोर दे रहे थे कि सरकार से उनकी पार्टी अलग नहीं होगी। उनकी दलील थी कि यूएमएल से उन्होंने सिर्फ आम चुनाव के लिए सीटों का तालमेल किया। उन्होंने सत्ताधारी गठबंधन को नहीं छोड़ा है। बताया जाता है कि मंत्रियों को हटाने के सवाल पर सत्ताधारी गठबंधन दलों के अंदर मतभेद थे।

ये बात उस समय जाहिर हुई है जब प्रधानमंत्री और नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष ने देउबा गठबंधन सहयोगियों की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल और राष्ट्रीय जन मोर्चा के नेताओं से इस मुद्दे पर बातचीत की। इस दौरान कुछ नेताओं ने राय जताई कि चुनाव के बाद संभव है गठबंधन को जनता समाजवादी पार्टी के समर्थन की जरूरत पड़ जाए। इसलिए उसे सरकार में बनाए रखा जा सकता है। लेकिन सूत्रों के मुताबिक देउबा उन मंत्रियों को हटाने के इरादे पर कायम रहे।

जनता समाजवादी पार्टी अब दलील दे रही थी कि प्रधानमंत्री को मंत्रियों को हटाने का अधिकार नहीं रहा है। पार्टी नेता और हटाए गए मंत्रियों में एक राजेंद्र श्रेष्ठ ने कहा कि कार्यवाहक सरकार की स्थिति में आने के बाद सरकार बड़े फैसले लेने की स्थिति में नहीं रहती है। मंत्रियों को हटाना एक बड़ा फैसला है। हमको नहीं लगता कि प्रधानमंत्री ऐसा निर्णय लेंगे।

प्रधानमंत्री कार्यालय सूत्रों ने कहा कि इस प्रश्न पर देउबा ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त दिनेश थपलिया की सलाह ली है। थपलिया ने उन्हें बताया कि कार्यवाहक अवस्था में प्रधानमंत्री नए मंत्री नहीं बना सकते लेकिन वे मंत्रियों को हटा सकते हैं। इसके बाद देउबा ने चारों मंत्रियों को हटाने का फैसला किया था।

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