खुशखबरी: कैलास मानसरोवर की यात्रा होगी आसान

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खुशखबरी: कैलास मानसरोवर की यात्रा होगी आसान

  • पीएम मोदी का सपना हुआ पूरा, उत्तराखंड के रास्ते हो सकेगी यात्रा
  • राजनाथ सिंह ने कहा, अब यात्रियों को तीन हफ्ते की बजाय सिर्फ एक हफ्ता लगेगा

कैलाश मानसरोवर की यात्रा अब काफी आसान होगी.दरअसल, उत्तराखंड में 17 हजार फीट की ऊंचाई पर लिपूलेख-धाराचूला मार्ग शुक्रवार से शुरू कर दिया गया है. इसके साथ ही मोदी सरकार का श्रद्धालुओं की सुरक्षा और उनकी दिक्कतों को देखते हुए उत्तराखंड से होकर जाया जा सकेगा. 80 किलोमीटर लंबे इस रास्ते का उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया. यह इलाका बेहद दुर्गम है. इसके अलावा चीन की सीमा भी यहां से काफी करीब है.

लिपुलेख तक जाएगी रोड
17 हजार से ज्यादा फीट की ऊंचाई पर 80 किलोमीटर लम्बी यह रोड कैलाश मानसरोवर को जोड़ने वाले लिपुलेख तक जाएगी. इस रोड का काम कई सालों से चल रहा था लेकिन ऊंचे पहाड़ और मुश्किल हालात से इसमें काफी दिक्कतें आ रही थी. अभी तक कैलाश मानसरोवर जाने में 3 हफ्ते से ज्यादा का वक्त लगता है जबकि लिपुलेख के रास्ते अब मात्र 90 किलोमीटर की सड़क यात्रा कर कैलाश मानसरोवर पहुंचा जा सकेगा.

राजनाथ ने क्या कहा?
अपने चार मिनट के संबोधन में डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने कहा कि अब कैलास मानसरोवर यात्रा 80 परसेंट यात्रा भारत में और 20 परसेंट यात्रा चीन में वाहनों से होगी. इसके बाद रक्षामंत्री ने हरी झंडी दिखाकर आइटीबीपी व एसएसबी के छोटे वाहनों को धारचूला के लिए रवाना किया. ये वाहन शनिवार सुबह धारचूला से चीन सीमा को रवाना होंगे.

सेना के लिए क्यों अहम?
सेना के लिए भी इस सड़क का खास महत्व है. चीन सीमा पर सैनिकों की तैनाती और रसद आपूर्ति आसान होगी. शुक्रवार को यहां 9 वाहन रवाना किए गए. सभी गाड़ियां बीआरओ और आईटीबीपी की थीं. प्रोजेक्ट के चीफ इंजीनियर विमल गोस्वामी ने कहा, यह बहुत बड़ी सफलता है. दर्शन के बाद श्रद्धालू सिर्फ एक दिन में देश वापस आ सकेंगे. रोड ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर नितिन गडकरी ने इसे सड़क को तैयार करने के लिए अप्रैल 2020 की डेडलाइन तय की थी.

क्या चाहती थी मोदी सरकार?
मोदी सरकार के एजेंडे में कैलाश मानसरोवर की यात्रियों की सुविधा का मुद्दा हमेशा से अहम रहा है. चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा के दौरान भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे सिक्किम में नाथुला मार्ग खोलने का आग्रह किया था, जिसे उन्होंने मान लिया था. लिपुलेख दर्रे के पार चीन में सीमा से मानसरोवर की दूरी महज 72 किलोमीटर है और सीमा से वहां चीन ने शानदार सड़क पहले ही बना रखी है.मोदी सरकार की योजना धारचुला में पर्यटक आधार शिविर को विकसित करने की थी, जहां से तीर्थयात्री एक दिन में ही मानसरोवर के दर्शन करके भारत लौट सकें.साल 2105 में सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि अप्रैल 2017 में वे पिथौरागढ़ के नए रास्ते से पीएम मोदी को कैलाश मानसरोवर ले जाना चाहते हैं. ऐसे में बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) दिन-रात काम करके कैलाश मानसरोवर के इस नए रास्ते को बनाने में जुटा रहा. इस सड़क के बन जाने से कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्रियों की संख्या में इजाफा होने की उम्मीद है.

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