गुजरात दंगों में बिलकीस बानो के अपराधियों के जेल से छूटने का मामला अभी गर्म ही है कि गोधराकांड के दोषी को भी 17 साल बाद ज़मानत मिल गयी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गोधरा कांड का दोषी फारूक 2004 से जेल में बंद है और 17 साल से जेल की सजा काट रहा है इसलिए उसे जेल से जमानत पर रिहा किया जाए. शीर्ष अदालत ने बाकी 17 दोषियों की अपीलों पर छुट्टियों के बाद सुनवाई करने को कहा है, इन सभी पर जलती हुई बोगी पर पत्थरबाजी का मामला है ताकि बोगी में फंसे लोग बाहर न निकल पाएं।
गुजरात सरकार किया ज़ोरदार विरोध
हालाँकि गुजरात सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ज़मानत के फैसले का ज़ोरदार विरोध किया। तुषार मेहता ने कहा कि यह कोई मामूली पथराव का मामला नहीं था. एक बोगी को अलग किया गया था और उस जलती हुई बोगी पर पत्थरबाज़ी की जा रही थी ताकी उसमें से कोई बाहर निकल न सके. पत्थरबाजों की मंशा यह थी कि बाहर से भी फायर ब्रिगेड उनको कोई मदद न कर सके. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इनमें से कुछ लोग लम्बी सजा काट चुके हैं और उन लोगों को जमानत दी जा सकती है.
बेंच ने दोषी फारूक के वकील की दलील स्वीकारी
बता दें कि मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पी एस नरसिम्हा की बेंच ने दोषी फारूक की तरफ से पेश अधिवक्ता की इस दलील को स्वीकार कर लिया कि जेल में अब तक बिताई गई अवधि के दौरान फारूक का बर्ताव बहुत अच्छा रहा और उसको को ध्यान में रखते हुए उसे जमानत मिलनी चाहिए. उधर बिलकीस बानों केस में दोषियों की रिहाई के फैसले पर दाखिल की गयी पुनर्विचार याचिका को सुनने के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है हालाँकि उसने जल्द सुनवाई की बिलकीस बानो की अपील को ठुकराते हुए फटकार भी लगाईं है कि एक ही बात को बार बार न दोहराया जाय.
