राजस्थान के मुख्यमंत्री की कुर्सी से चिपके रहने की मुख्यमंत्री गेहलोत की कोशिशों को उस समय बड़ा झटका लगा जब कल शाम उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी से मुलाकात की और उस मुलाकात में उन्हें पता चल गया कि उनके पास अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने और CM की कुर्सी पर बने रहने का ऑप्शन नहीं है, उन्हें अपनी कुर्सी का त्याग करना ही पड़ेगा और अब मिल रही ख़बरों के मुताबिक उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने का मन बना लिया है.
हालाँकि अशोक गेहलोत जब दिल्ली के लिए चले थे तभी अपने विधायकों को बता आये थे कि वो परचा भरने जा रहे हैं, बावजूद इसके कि वो एकबार फिर राहुल गाँधी को मनाने की कोशिश करेंगे लेकिन लगता है कि उनकी सारी कोशिशें नाकाम हो चुकी हैं और अब उनके पास चुनाव लड़ने के अलावा कोई चारा नहीं है. ऐसी भी ख़बरें हैं कि अगर वो चुनाव लड़ने से इंकार भी करते हैं तो भी उनकी कुर्सी सलामत रहेगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है.
दरअसल गेहलोत ने जब ये कहा कि वो दो पदों के साथ न्याय नहीं कर सकते तभी पता लग गया था कि उन्होंने सरेंडर कर दिया है वर्ना इससे पहले दो पदों के सवाल पर उनका कहना था कि एक व्यक्ति एक पद की बात मनोनयन पर लागू होती है, चूँकि कांग्रेस अध्यक्ष पद चुनाव एक ओपन चुनाव है इसलिए इसपर यह सिद्धांत लागू नहीं होता, कोई भी मंत्री अगर कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ना चाहे तो लड़ सकता है और मंत्री भी रह सकता लेकिन लगता है कि सोनिया गाँधी से मुलाकात के बाद बात उनकी समझ में आ गयी है.
वहीँ गेहलोत अब यह भी दावा कर रहे हैं कि माहौल उनके पक्ष में है और वो सीधे रूप से शशि थरूर से मुकाबला करेंगे, हालाँकि इसमें अब दिग्विजय सिंह की भी इंट्री हो चुकी है, उन्होंने भी चुनाव लड़ने का संकेत दे दिया है. वहीँ सचिन पायलट को राजस्थान की कमान सौंपने के सवाल पर अशोक गेहलोत ने कहा कि यह राजस्थान के विधायक और सोनिया गाँधी तय करेंगी।

