Gaganyaan Mission Test: गगनयान क्रू एस्केप मॉड्यूल का परीक्षण सफल

नेशनलGaganyaan Mission Test: गगनयान क्रू एस्केप मॉड्यूल का परीक्षण सफल

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Gaganyaan Mission Test Flight updates: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) आज श्रीहरिकोटा परीक्षण रेंज से गगनयान मिशन के व्हीकल टेस्ट फ्लाइट (टीवी-डी1) का पहला परीक्षण कर लिया है। परीक्षण सफल रहा। इसके लिए इसरो प्रमुख ने आज बधाई दी है।

गगनयान मिशन के लिए टेस्ट उड़ान टीवी-डी1 को सुबह आठ बजे लॉन्च होना था। लेकिन अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए, लॉन्च टाइम 30 मिनट आगे बढ़ा दिया। हालांकि खराब मौसम की वजह से इसरो ने मिशन को 10 बजे लॉन्च कर दिया। अंतरिक्ष में भेजने के बाद इसे सफलतापूर्वक बंगाल की खाड़ी में उतार लिया गया है।

क्रू-एस्केप मिशन, जिसे सफलतापूर्वक दिया अंजाम

इसरो ने बताया कि फ्लाइट टेस्ट व्हीकल अबॉर्ट मिशन1 में अनहोनी की दशा में अंतरिक्ष यात्रियों को बचाने में क्रू-एस्केप प्रणाली काम आएगी। उड़ान भरते समय मिशन में गड़बड़ी हुई तो यह प्रणाली क्रू मॉड्यूल के साथ यान से अलग होगी। कुछ समय उड़ेगी और श्रीहरिकोटा से 10 किमी दूर समुद्र में उतरेगी। इसमें मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों को नौसेना की ओर से समुद्र से सुरक्षित वापस लाया जाएगा।

परीक्षण के तीन उद्देश्य पूरे

परीक्षण वाहन की उप प्रणालियों का उड़ान प्रदर्शन और मूल्यांकन। अलग-अलग प्रणालियों के एक दूसरे से अलग होने व क्रू एस्केप सिस्टम का उड़ान प्रदर्शन और मूल्यांकन। क्रू मॉड्यूल की विशेषताओं और इसकी गति धीमी करने वाली प्रणालियों का प्रदर्शन और पुनर्प्राप्ति।
सफल लॉन्चिंग पर इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ ने गगनयान की सफलता को लेकर कहा कि मुझे गगनयान टीवी-डी1 मिशन की सफलता की घोषणा करते हुए बहुत खुशी हो रही है।

इसरो के गगनयान मिशन के पहले टेस्ट मिशन (टीवी-डी-1) का लॉन्च सफल रहा है। क्रू एस्केप मॉड्यूल लॉन्च के बाद अंतरिक्ष में पहुंचा और फिर सही-सलामत बंगाल की खाड़ी में उतर गया। गगनयान के पहले टेस्ट व्हीकल एबॉर्ट मिशन -1 (टीवी-डी1) को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया। परीक्षण के तहत तरल ईंधन पर चलने वाले सिंगल स्टेज रॉकेट के साथ गगनयान के क्रू मॉड्यूल को अंतरिक्ष में भेजा गया है। उड़ान के करीब एक मिनट बाद 12 से 17 किमी की ऊंचाई पर अभियान को रद्द करने की कमांड दी गई। इस कमांड के साथ क्रू एस्केप सिस्टम सक्रिय हो जाएगा और 90 सेकंड में यह क्रू मॉड्यूल से अलग होगा। इसके बाद क्रू मॉड्यूल वापस पृथ्वी पर लौटेगा।

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