जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े संदिग्ध आतंकी के संपर्क में होने का आरोप, मोबाइल से मिले अहम डिजिटल सबूत
पुलवामा हमले से जुड़ी चर्चाओं और संदिग्ध चैट ने बढ़ाई एजेंसियों की चिंता, नेटवर्क की तलाश जारी
कासगंज। उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने कासगंज में एक ऐसी कार्रवाई को अंजाम दिया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और बढ़ा दी है। सुनगढ़ी थाना क्षेत्र की किसोल कॉलोनी से 18 वर्षीय शाहबाज सिद्दीकी को गिरफ्तार किया गया है। जांच में उसके कथित तौर पर सीमा पार सक्रिय आतंकी नेटवर्क से जुड़े लोगों के संपर्क में होने के संकेत मिले हैं।
एटीएस के मुताबिक युवक की गतिविधियां काफी समय से निगरानी में थीं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उसकी सक्रियता और कुछ संदिग्ध संवादों ने एजेंसियों का ध्यान आकर्षित किया था। जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन की पड़ताल की गई, जिसमें कई चैट, संपर्क और अन्य डिजिटल सामग्री सामने आई। इन्हीं तथ्यों के आधार पर कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया।
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि शाहबाज की बातचीत सोशल मीडिया और मैसेजिंग एप्स के जरिए ‘उमर’ नामक व्यक्ति से होती थी। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि यह व्यक्ति प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा हुआ है। दोनों के बीच लंबे समय से संवाद होने के संकेत मिले हैं, जिनकी तकनीकी और कानूनी स्तर पर जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियों को कुछ चैट रिकॉर्ड भी मिले हैं, जिनमें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील विषयों पर चर्चा होने की बात कही जा रही है। सूत्रों के अनुसार, 14 फरवरी से संबंधित बातचीत में पुलवामा आतंकी हमले का उल्लेख भी सामने आया है। कुछ संदेशों में भारत विरोधी टिप्पणियों और पाकिस्तान में जश्न मनाए जाने जैसी बातें दर्ज होने का दावा किया गया है। हालांकि एजेंसियां इन संदेशों की प्रामाणिकता और उद्देश्य की विस्तृत जांच कर रही हैं।
एटीएस की यह कार्रवाई 18 मई को की गई थी, लेकिन डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद मामले का दायरा लगातार बढ़ रहा है। सुरक्षा एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि युवक का संपर्क केवल ऑनलाइन स्तर तक सीमित था या वह किसी व्यापक नेटवर्क का हिस्सा भी था।
फिलहाल एटीएस, खुफिया विभाग और स्थानीय पुलिस संयुक्त रूप से मामले की जांच में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की गंभीरता से पड़ताल की जा रही है और यदि जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह मामला एक बार फिर सोशल मीडिया के जरिए फैल रहे कट्टरपंथी प्रभाव और सुरक्षा चुनौतियों की ओर इशारा करता है।
