झांसा देकर पांच लाख रूपये तक ठग लेते थे बेरोजगार युवकों से
सर्विलांस सेल टीम व थाना मेडिकल पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी
मेरठ। बेरोजगार युवकों को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का भांडाफोड करते हुए सर्विलांस सेल टीम व थाना मेडिकल पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ठगों के इस गिरोह ने बेरोजगारों से लाखों रूपये ऐंठे हैं। एक आरोपी फरार है जिसकी तलाश में टीम गठित की गयी है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मेरठ को जनपद में बेरोजगार युवकों से सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले व्यक्तियों/गिरोह की सूचनाये मिल रही थी। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा पुलिस अधीक्षक नगर व ए0एस0पी0 सिविल लाईन के निर्देशन में सर्विलांस सेल टीम को मामले की जांच के लिये नियुक्त किया।
आज सर्विलांस सेल टीम नें थाना मेडिकल पुलिस के साथ इस गिरोह के तीन सदस्यों को यूनिवर्सिटी के पास से गिरफ्तार कर लिया। बेरोजगार युवको को सरकारी नौकरी दिलाने इस फर्जी गिरोह का मास्टर मांइड योगेन्द्र शर्मा पुत्र किशन स्वरूप शर्मा है जो एमए बीएड तक शिक्षा प्राप्त है योगेन्द्र शर्मा अपने साथी योगेश शर्मा पुत्र प्रेमचन्द्र शर्मा निवासी-मौहल्ला मुफ्तीवाडा कस्बा व थाना शिकारपुर जनपद बुलन्दशहर, इन्द्रराज सिंह पुत्र मदन लाल निवासी-गांव रसूलपुर थाना बाबूगढ जनपद हापुड, नवीन शर्मा पुत्र मूलचन्द्र निवासी- ग्राम-निखू पोस्ट सटला थाना सयाना जनपद बुलन्दशहर साथ अन्य लोगो को मिलाकर हरियाणा दिल्ली उत्तर प्रदेश के आदि के बेरोजगार युवको को आर्मी, राजस्थान पुलिस, दिल्ली पुलिस, हरियाणा पुलिस, असम राईल, एफ0सी0आई0 एवं एम0ई0एस0 आदि में नौकरी दिलवाने के नाम पर 3 लाख से 6 लाख रूपये तक ठग लेता था। योगेश शर्मा फरार है जिसकी तलाश में टीम गठित की गयी हैै।
फर्जी सरकारी अधिकारी, फर्जी नियुक्ति पत्र, फर्जी मिली नौकरी
गिरोह के सरगना योगेन्द्र ने पुछताछ करने पर बताया कि वह अपने साथियों के साथ मिलकर ऐसे बेरोजगार युवको को तलाशते थे जो इन्टर अथवा बी0ए0 करने के पश्चात नौकरी के लिये प्रयास कर रहे हांे। ऐसे जरूरतमद युवको को इस गिरोह के लोग अपने झांसे में फंसाकर उन्हें आर्मी, पुलिस, एफ0सी0आई में सरकारी नियुक्ति दिलाने के लिये तैयार कर लेते थे। इसके बाद वह युवकों को अपने साथ गाडी में बैठाकर लखनऊ, दिल्ली में ले जाकर किसी होटल में बिठाकर अपने गिरोह के दूसरे सदस्य से मिलवातें थे जो उनसे सरकारी विभाग का अफसर बनकर मिलता था। यह फर्जी अधिकारी उनसे सभी जरूरी कागज जैसे, अंक तालिका, आधार कार्ड, जाति व निवास प्रमाण पत्र आदि अपने पास जमा करा लेते थे और 3 से 6 लाख रूपये नौकरी दिलाने के नाम पर ले लेते थें। पैसे लेनेे के बाद फर्जी नियुक्ति पत्र भी दे दिया जाता है और एक से दो महीने के बीच में नौकरी पर भेजने के लिये कहकर घर भेज दिया जाता था। यह बेरोजगार युवक नौकरी मिलने की खुशी में अन्य युवकों को इस बारे में बताते तो वह भी झांसे में आकर रूपये दे देते थे। इस गिरोह द्वारा अपने बैंक अंकाउटों में पैसा जमा करा लिया जाता है एवं नगद धनराशि भी प्राप्त की जाती है।
यह गिरोह बेहद चालकी से कुछ युवको को फर्जी आई कार्ड बनवाकर एम0ई0एस0 एवं एफ0सी0आई0 के गोदामों में काम करने वाले ठेकेदारों से सम्पर्क करके उन्हें प्रति व्यक्ति 02 हजार रूप्यें देकर 10 से 15 दिन के लिये ऐसे युवको उनके पास भेज देते थे। कुछ दिन वहां पर उनसे काम कराने के बाद छुटटी देकर घर भेज देते हैं। जिनको दोबारा फिर कभी नही बुलाया जाता। कुछ समय बाद जब पैसे देकर फर्जी भर्ती हुये युवक इन पर दवाब बनाते थें तो यह ट्रेनिंग पर भेजने के नाम से टरकाते रहते थे। इस प्रकार यह गिरोह लाखों रूप्यें वसूल लेता था। इनके पास से फर्जी नियुक्ति पत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, आदि बरामद हुये हैं ।

