Site icon Buziness Bytes Hindi

Krishna Janmashtami 2022: साल में ये चार रात्रियाँ विशेष पुण्य प्रदान करने वाली, इनमें से एक जन्माष्टमी की रात

भारतीय ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक साल में चार रात्रियों को विशेष पुण्य प्रदान करने वाली बताया गया है। इन चार रात्रों में पहली दिवाली की रात दूसरी महाशिवरात्रि की रात तीसरी होली की रात और चौथी कृष्ण जन्माष्टमी की रात बताई गई है। इन विशेष रात्रियों का जप, तप, जागरण बहुत पुण्य प्रदायक बताया गया है। इन रात्रि में किया गया पूजा पाठ बहुत ही पुण्यदायी बताया गया है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की रात्रि को मोहरात्रि भी कहा गया है। इस रात में योगेश्वर श्रीकृष्ण का ध्यान और उनका नाम अथवा मन्त्र जपते हुए जागने से संसार की मोह-माया से मुक्ति मिल जाती है। जन्माष्टमी का व्रत व्रतराज बताया गया है। जन्माष्टमी का व्रत का पालन करना चाहिए।

Read also: Maharashtra Accident News: गोंदिया में भीषण ट्रेन हादसा,मालगाड़ी से टकराई यात्री ट्रेन 50 घायल

जन्माष्टमी व्रत-उपवास की महिमा:-

जन्माष्टमी का व्रत रखना चाहिए। इससे बड़ा लाभ होता है। जन्माष्टमी के व्रत से सात जन्मों के पाप-ताप मिट जाते  हैं। जन्माष्टमी एक तो उत्सव है, दूसरा पर्व है, तीसरा महान व्रत-उपवास और पावन दिन है। वायु पुराण और कई ग्रंथों में जन्माष्टमी के दिन की महिमा के बारे में बताया गया है। जो जन्माष्टमी की रात्रि को उत्सव के पहले अन्न खाता है, भोजन कर लेता है उसको नराधम बताया गया है।  जो उपवास करता है, जप-ध्यान करके उत्सव मना के फिर खाता है वह अपने कुल की 21 पीढ़ियाँ को मोक्ष दिलाता है। वह मनुष्य परमात्मा को साकार रूप में अथवा निराकार तत्त्व पाने में सक्षमता की तरफ आगे बढ़ जाता है। इसका मतलब यह नहीं कि व्रत की महिमा सुनकर मधुमेह वाले या कमजोर लोग पूरा व्रत रखें। बालक, अति कमजोर तथा बूढ़े लोग अनुकूलता के अनुसार थोड़ा फल आदि खायें। जन्माष्टमी के दिन किया हुआ जप अनंत गुना फल देने वाला बताया गया है। जन्माष्टमी की पूरी रात जागरण करके ध्यान का विशेष महत्त्व बताया गया है। जिसको क्लीं कृष्णाय नमः मंत्र का और गुरु मंत्र का थोड़ा जप करने को मिल जाय, उसके त्रिताप नष्ट होने में देर नहीं लगती। भविष्य पुराण के अनुसार जन्माष्टमी का व्रत संसार में सुख-शांति और प्राणीवर्ग को रोगरहित करने वाला बताया गया है।

Exit mobile version