कींव। संयुक्त राष्ट्र परमाणु निगरानी प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने रूस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राफेल ने कहा कि यूक्रेन में रूसी कब्जे वाले जपोरिझिया परमाणु संयंत्र की भौतिक अखंडता का उल्लंघन किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वो हालात से पहले से चिंतित रहे हैं। जबकि क्षेत्र में अभी भीषण संघर्ष जारी है। ऐसी स्थिति में कुछ भी हो सकता है। अगर ऐसा हुआ तो काफी भयावह स्थिति हो सकती है। जिसका असर दूर तक पडे़गा। राफेल ने परमाणु संयंत्र में कई घंटे बिताने के बाद यह बात कही है। उन्होंने कहा कि यहां गोलीबारी का सामना करना पड़ रहा है। आईएईए महानिदेशक और संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों की टीम यूरोप के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र में भौतिक नुकसान का आकलन करने के लिए पहुंची थी।
संयंत्र पर फरवरी के अंत में रूसी सेना ने यूक्रेन पर हमले के तुरंत बाद कब्जा कर लिया था। इस बीच पूरे क्षेत्र में भीषण संघर्ष में रूस और यूक्रेन दोनों एक-दूसरे पर आक्रामक होने का आरोप लगा रहे हैं। राफेल ने यूक्रेनी कब्जे वाले क्षेत्र से वापसी पर कहा कि यहां भौतिक अखंडता का उल्लंघन काफी चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि तकनीकी पहलुओं का विश्लेषण करने के बाद उनकी टीम को बहुत सारे काम करने की जरूरत होगी। आईएईए प्रमुख राफेल ने कहा कि हम कहीं नहीं जा रहे हैं। आईएईए अब संयंत्र में हैं और वहीं रहने वाला हैं। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ वहां जमीन पर जो कुछ हो रहा है उसका निष्पक्ष और तटस्थ तकनीकी रूप से मूल्यांकन कर आंकलन करेंगे। आईएईए टीम को संयंत्र स्थल के पास गोलाबारी के चलते कई घंटे पहुंचने में लगे। ग्रॉसी ने कहा कि स्पष्ट रूप से इस संयंत्र के चारों ओर आग थी। मशीनगनों, तोपखानों से मोर्टार दागे जा रहे हैं। इस कारण संयंत्र का एक रिएक्टर देर रात बंद करना पड़ा।
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रिपब्लिकन पार्टी सांसदों के समूह ने चिंता जताई कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नियंत्रण वाली कंपनी का उपयोग चीन निश्चित रूप से यूक्रेन पर रूसी हमले में सहयोग के लिए करेगा। कंपनी का नाम यूनिपेक अमेरिका है। जिसे अमेरिका तेल आपूर्ति करता है। रिपब्लिकन सांसदों ने कहा कि यूनिपेक को तेल बेचने का फैसला परेशानी भरा है।
