छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती और आरएसएस सरसंघचालक गोलवलकर की जयंती पर श्रद्धजंलि

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छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती और आरएसएस  सरसंघचालक गोलवलकर की जयंती पर श्रद्धजंलि

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने आज वीर शौर्यवान योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के अवसर पर उन्हें याद करते हुये कहा कि शिवाजी महाराज अद्म्य साहस के धनी, योग्य सेनापति तथा कुशल राजनीतिज्ञ थे। जिन्होंने एक मजबूत मराठा साम्राज्य की नींव रखी और दक्कन से लेकर कर्नाटक तक मराठा साम्राज्य का विस्तार किया ऐसे महान शासक को शत-शत नमन।

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स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दूसरे सरसंघचालक, श्री माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर ‘गुरुजी’ के जयंती पर भावपूर्ण श्रद्धाजंलि अर्पित करते हुये कहा हमारे देश का यह सौभाग्य है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में श्रद्धेय गुरूजी से लेकर आधुनिक वैज्ञानिक, ऋषि माननीय मोहन भागवत तक और स्वयं सेवक संघ परिवार के सभी सदस्य में सेवा, सयंम  और समर्पण का अद्भुत संगम है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि शिवाजी महाराज धर्मपरायण होने के साथ-साथ धर्म सहिष्णु भी थे। उनके शासनकाल एवं साम्राज्य में सभी को धार्मिक स्वतंत्रता दी गयी थी और वे सभी धर्मो, मतों और सम्प्रदायों का आदर और सम्मान करते थे। शिवाजी महाराज ने भारतीय संस्कृति, मूल्यों तथा शिक्षा पर अधिक बल दिया।  

स्वामी जी ने कहा कि सम्पूर्ण विश्व के लिये ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की कामना करने वाली भारतीय संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम् के सूत्र को आत्मसात कर शान्ति के साथ जीवन में आगे बढ़ने का संदेश देती है। जिसकी रक्षा के लिये शिवाजी महाराज, श्री माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर और पन्नाधाय का महत्वपूर्ण योगदान था। मानव जीवन के अस्तित्व के साथ ही भारतीय संस्कृति ने सम्पूर्ण मानवता को जीवन के अनेक श्रेष्ठ सूत्र दिये और आज भी उन सूत्रों और मूल्यों को धारण कर वह निरंतर विकसित हो रही है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने मेवाड़ राजवंश के राणा कुवंर उदयसिंह को बचाने वाली पन्नाधाय की श्रद्धा और देशभक्ति को नमन करते हुये कहा कि पन्नाधाय ने राजवंश के प्रति निष्ठा और अपने कर्तव्यों का पालन करते हुये राजकुमार उदयसिंह व मेवाड़ राजवंश  को बचाने के लिये अपने पुत्र का बलिदान कर दिया ऐसी मातृशक्ति को नमन।  

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आईये आज शिवाजी महाराज और श्री माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर ‘गुरुजी’ की जयंती के पावन अवसर पर भारत की अखंडता और अक्षुण्ता को बनाये रखने का संकल्प करें।

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